AI War Content: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच X ने नया नियम लागू किया है। अब अगर कोई क्रिएटर एआई की मदद से युद्ध या सशस्त्र संघर्ष से जुड़े वीडियो बनाकर पोस्ट करता है और यह साफ तौर पर नहीं बताता कि वीडियो एआई से बनाया गया है, तो उसे रेवेन्यू-शेयरिंग प्रोग्राम से हटाया जा सकता है।
भ्रामक एआई कंटेंट पर कार्रवाई तय
आजकल युद्ध और संकट के समय एआई तकनीक से ऐसे वीडियो और तस्वीरें बनाई जा रही हैं जो बिल्कुल असली जैसे दिखते हैं। इससे लोगों के बीच गलत जानकारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है और वे वास्तविक घटनाओं को सही तरीके से समझ नहीं पाते हैं। इसी समस्या को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
प्रोडक्ट हेड निकिता बियर ने कहा कि युद्ध के समय सही और भरोसेमंद जानकारी लोगों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। अगर कोई क्रिएटर एआई से बना युद्ध संबंधी कंटेंट पोस्ट करता है और यह स्पष्ट नहीं करता कि कंटेंट एआई से तैयार किया गया है, तो उसे 90 दिनों के लिए क्रिएटर रेवेन्यू शेयरिंग प्रोग्राम से सस्पेंड किया जाएगा।

AI War Content: एआई कंटेंट नियंत्रण के लिए सख्त कदम
भ्रामक एआई कंटेंट की पहचान के लिए प्लेटफॉर्म आधुनिक तकनीक का उपयोग करेगा। इसमें ऑटोमेटेड सिस्टम और कम्युनिटी आधारित मॉडरेशन सिस्टम दोनों शामिल होंगे। एआई से बने मीडिया की पहचान के लिए ऐसे टूल्स इस्तेमाल किए जाएंगे जो जेनरेटिव एआई से तैयार कंटेंट को पहचान सकते हैं।
भ्रामक युद्ध वीडियो पर सख्त कार्रवाई
साथ ही, कम्युनिटी नोट्स फीचर को मजबूत किया जाएगा। अगर किसी पोस्ट को यूजर्स भ्रामक मानते हैं, तो वे उस पर अतिरिक्त संदर्भ या फैक्ट-चेक जानकारी जोड़ सकेंगे। यह फीचर कंटेंट मॉडरेशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। X का क्रिएटर रेवेन्यू शेयरिंग प्रोग्राम योग्य यूजर्स को उनके पोस्ट पर एंगेजमेंट के आधार पर विज्ञापन आय का हिस्सा देता है। इस योजना का उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर ज्यादा गतिविधि और कंटेंट को बढ़ावा देना था।
हालांकि, कई शोधकर्ताओं और यूजर्स ने इस मॉडल की आलोचना भी की है। उनका कहना है कि अगर भुगतान केवल एंगेजमेंट के आधार पर किया जाएगा, तो कुछ क्रिएटर्स ज्यादा व्यूज और कमेंट पाने के लिए सनसनीखेज या विवादित कंटेंट पोस्ट कर सकते हैं, जिससे गलत या भ्रामक पोस्ट के वायरल होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा, पेड सब्सक्रिप्शन जैसी पात्रता शर्तें और अपेक्षाकृत कमजोर कंटेंट नियंत्रण व्यवस्था भी वायरल लेकिन भ्रामक कंटेंट को बढ़ावा दे सकती है।






