Al-Falah University: दिल्ली लालक़िले के पास हुए हालिया कार धमाके के बाद जब आरोपी डॉक्टर उमर नबी का लिंक अल-फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आया तो सुरक्षा ऐजेंसियो ने उसकी पूरी पृष्ठभूमि खंगालना शुरू कर दी। इसी जांच के दौरान एक और पुराना मामला सामने आया, जिसने ऐजेंसियो को चौंका दिया।जाँच में यह बात सामने आई है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम इससे पहले भी गंभीर आतंकी मामलों में जुड़ चुका है और यह पहला मामला नहीं है।
Al-Falah University: 2007 अहमदाबाद ब्लास्ट में शामिल था अल-फलाह छात्र
2007 में अहमदाबाद में हुए लगातार धमाकों के मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। बाद में इंटेलिजेंस एजेंसियों की जांच में यह खुलासा हुआ कि इन धमाकों में शामिल इंडियन मुजाहिदीन के एक प्रमुख सदस्य मिर्ज़ा शादाब बेग पहले फरीदाबाद स्थित अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र रह चुका था। उनके इस कॉलेज से जुड़े होने की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई, क्योंकि इससे उसकी शिक्षा और तकनीकी ज्ञान का अंदाजा लगाया जा सका। यह भी पता चला कि अपने अध्ययन के दौरान मिर्ज़ा शादाब ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन के क्षेत्र में अच्छी पकड़ बनाई थी, जो बाद में उसे विस्फोटक उपकरणों और बैग बम बनाने में मददगार साबित हुई।
Al-Falah University: कौन है मिर्ज़ा शादाब बेग?
मिर्ज़ा शादाब बेग ने फरीदाबाद के अल-फला इंज़ीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक किया था। पढ़ाई के दौरान ही उसने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ और सर्किट्स पर इतनी मजबूत पकड़ बना ली थी कि किसी भी जटिल सर्किट को समझना और तैयार करना उसके लिए आसान हो गया था। यही तकनीकी कौशल बाद में उसके गलत इस्तेमाल का कारण बना और उसे विस्फोटक उपकरण तथा बैग बम बनाने वाली टीम का महत्वपूर्ण सदस्य माना जाने लगा। धमाकों से करीब 15 दिन पहले वह अहमदाबाद पहुँचा था, जहाँ उसने तीन अलग-अलग टीमों के साथ लगातार काम किया। इन दिनों में उसने शहर की रेकी से लेकर प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स और IED फिटिंग तक हर चरण में हिस्सा लिया। इलेक्ट्रॉनिक टाइमर सेट करना, वायरिंग करना और विस्फोटक उपकरणों को एक्टिवेट करने की तकनीकी प्रक्रिया में उसकी भूमिका सबसे अहम थी। अहमदाबाद में उसके ये 15 दिन पूरी साजिश को अंजाम तक पहुँचाने की तैयारी में बीते।
गोरखपुर धमाकों का गुनाहगार था मिर्ज़ा शादाब
साल 2007 में गोरखपुर में लगातार हुए धमाकों की जांच के दौरान मिर्ज़ा शादाब बेग का नाम पहली बार गंभीर रूप से सामने आया था। इन धमाकों में कुल छह लोग घायल हुए थे और स्थानीय पुलिस के लिए यह मामला बड़े खतरे का संकेत माना गया था। जांच आगे बढ़ी तो सुरागों ने साफ किया कि इस घटना में शादाब की भूमिका संदिग्ध है। इसके बाद गोरखपुर पुलिस ने उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी संपत्ति भी ज़ब्त कर ली थी। उस समय से ही वह सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में आ गया था।
Al-Falah University: 2008 के बाद से फरार है मिर्ज़ा शादाब बेग
2008 में जब इंडियन मुजाहिदीन नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, तो कई मामलों में शामिल नाम सामने आए। इन्हीं नामों में मिर्ज़ा शादाब बेग भी शामिल था। दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और गोरखपुर धमाकों में उसका नाम जुड़ने के बाद उस पर 1 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया गया। इस इनाम की घोषणा के बाद से ही वह देश छोड़कर फरार हो गया और लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, मिर्ज़ा शादाब को साल 2019 में आख़िरी बार अफगानिस्तान में लोकेट किया गया था। उसी समय से वह सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से पूरी तरह बाहर हो गया और लगातार फरारी की जिंदगी जी रहा है। एजेंसियों का कहना है कि उसके खिलाफ कई अहम सबूत होने के बावजूद, वह पिछले कई वर्षों से देश की किसी भी सुरक्षा एजेंसी या पुलिस के हाथ नहीं लग सका है। उसकी गतिविधियों को लेकर इनपुट मिलते रहे हैं, लेकिन वह हर बार लोकेशन बदलकर बच निकलता है। जांच टीमों का मानना है कि शादाब अपने नेटवर्क और पुराने संपर्कों की मदद से नक़ली पहचान का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न इलाकों में छिपकर रहता है, जिसकी वजह से उसे ट्रेस करना अब तक बेहद मुश्किल साबित हुआ है।
यूनिवर्सिटी से जुड़े अपराधों की फाइल दोबारा खुलीं
दिल्ली लाल किले के पास हुए कार धमाके की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। सुरक्षा एजेंसियों को जब यह पता चला कि आरोपी डॉ. उमर नबी का संबंध अल-फला यूनिवर्सिटी से रहा है, तो अधिकारियों ने तुरंत इस संस्थान से जुड़े पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए। जांच टीमों का मानना है कि धमाके की साजिश को समझने के लिए आरोपी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और उसके पुराने नेटवर्क को खोजना बेहद ज़रूरी है। इस कड़ी में यह तथ्य भी सामने आया कि यह पहला मौका नहीं है जब इस यूनिवर्सिटी का नाम किसी गंभीर धमाके या आतंकी गतिविधि से जुड़ा हो। इससे पहले मिर्ज़ा शादाब बेग जैसे व्यक्ति, जिनका नाम कई बड़े धमाकों में सामने आ चुका है, इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे। यह समानता सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि दो अलग-अलग मामलों में एक ही संस्थान से जुड़ाव सामने आना किसी बड़े पैटर्न की ओर संकेत कर सकता है। इन खुलासों के बाद एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी से जुड़े सभी पुराने दस्तावेज, छात्रों की जानकारी और उनकी कैंपस गतिविधियों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं अतीत में कोई और ऐसा छात्र तो नहीं रहा, जिसका नाम किसी संदिग्ध गतिविधि या संगठन से जुड़ा हो, या फिर अभी भी कैंपस में कोई ऐसा नेटवर्क सक्रिय न हो। सुरक्षा एजेंसियां यह भी समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन दोनों मामलों में कोई सीधा या कही ना कही कोई संबंध मौजूद है, या यह सिर्फ संयोग है कि आरोपी एक ही संस्थान से आए। जांच टीमें लगातार तथ्यों को जोड़कर बड़े नेटवर्क तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं ताकि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
लेखक: निशी शर्मा
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