Ambedkar insult case: डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और आपत्तिजनक नारे लगाने के मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका पर शनिवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशल डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केस डायरी तलब करते हुए राज्य शासन से जवाब मांगा। शासन की ओर से समय मांगे जाने पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई रविवार, 4 जनवरी को तय की है। अब रविवार की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एडवोकेट अनिल मिश्रा और उनके साथी जेल से बाहर आएंगे या उन्हें कैद में ही रहना होगा।
बचाव पक्ष की दलीलें
जेल में बंद अनिल मिश्रा समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि- ग्वालियर पुलिस ने विधि प्रक्रिया का पालन नहीं किया, पहले गिरफ्तारी की गई और बाद में एफआईआर दर्ज की गई, परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना समय पर नहीं दी गई, और एससी/एसटी एक्ट के तहत नोटिस देकर छोड़ने का प्रावधान होने के बावजूद प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
Ambedkar insult case: जिला न्यायालय से जमानत खारिज
गौरतलब है कि अंबेडकर अपमान मामले में जिला न्यायालय की जेएमएफसी कोर्ट ने एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए सभी को जेल भेज दिया था। पुलिस ने इस मामले में साइबर सेल थाने में अनिल मिश्रा समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
वीडियो वायरल होने से फैला आक्रोश
आरोप है कि बीते गुरुवार को एसपी कार्यालय के सामने अनिल मिश्रा ने अपने साथियों के साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर का चित्र जलाते हुए नारे लगाए।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही दलित समाज में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके बाद शहर में कई जगह धरना-प्रदर्शन हुए।
दलित संगठनों की रासुका लगाने की मांग
दलित संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग की है। पुलिस ने गुरुवार देर रात अनिल मिश्रा और उनके साथियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। जमानत नहीं मिलने पर सभी को जेल भेज दिया गया।
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