Baba Ramdev: स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जन्म जयंती और आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, आर्य उप-प्रतिनिधि सभा ने हरिद्वार में एक भव्य “आर्य राष्ट्र निर्माण यात्रा” का आयोजन किया। शोभा यात्रा में गुरुकुलों के विद्यार्थी, आर्य समाज के संत, विद्वान और श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। गुरुकुल छात्र-छात्राओं ने लाठी, तलवार, भाला, रक्षा-प्रदर्शन में शौर्य दिखाया, जबकि योगाभ्यास और वैदिक प्रस्तुतियों ने गहरी आध्यात्मिकता का माहौल बनाया।
बाबा रामदेव का संदेश: वेदो की तरफ लौटो
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि योग गुरु बाबा रामदेव ने वेदों के मार्ग की ओर लौटने का जोरदार आह्वान किया। उनके शब्दों में: देश तमाम तरह के फसादों में फंसा हुआ है। इन सब से बचाने के लिए महर्षि दयानंद ने हमें वेदों का मार्ग दिखाया है। हम सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं। इस देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए एक बहुत बड़ी शोभा यात्रा रखी गई है। हमें विश्वास है कि भारतवर्ष फिर से सनातन के रास्ते पर चलेगा।” रामदेव ने ये भी कहा कि अगर महर्षि दयानंद न होते, तो गुरुकुल पद्धति, वैदिक शिक्षा और पाश्चात्य आडंबरों के खिलाफ यह जागरण संभव न हो पाता
Baba Ramdev: यज्ञ-हवन और नौ सूत्रीय मांगें
महर्षि दयानंद की जयंती पर कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी दर्शनानंद गुरुकुल महाविद्यालय (ज्वालापुर) में यज्ञ-हवन के साथ हुई। यात्रा के प्रतिनिधि मंडल ने उत्तराखंड राज्यपाल को नौ सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें प्रमुख मांगें थीं: निःशुल्क शिक्षा, चिकित्सा और न्याय, चरित्र निर्माण, जनसंख्या नियंत्रण कानून, समलैंगिकता और लिव-इन संबंधों पर सख्त कानून, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना, गुरुकुल पद्धति को पुनर्जीवित करना आदि।
Baba Ramdev: महत्व और भविष्य की दिशा
वक्ता स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि आर्य समाज सदैव राष्ट्रवाद और भारतीयता की अलख जगाता आया है। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य प्रभावों के कारण भारतीय समाज अपनी जड़ों से दूर हो रहा है। इसी कड़ी में यह यात्रा राष्ट्र को मूल वैदिक संस्कृति से पुनः जोड़ने का प्रयास है। इस आयोजन को भारत में एक आध्यात्मिक-सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है। बाबा रामदेव का दावा है कि जल्द ही भारत दुनिया को मानवीय मूल्यों का एक आदर्श रास्ता दिखाएगा।
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