Balochistan Killings: बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। प्रमुख मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों द्वारा तीन नागरिकों की हत्या कर दी गई। इन घटनाओं ने पहले से ही अशांत इस प्रांत में जारी हिंसा और उत्पीड़न के माहौल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हिरासत में यातना के आरोप
बलोच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग के अनुसार, गंज बख्श का क्षत-विक्षत शव गुरुवार को उसके परिवार को सौंपा गया। बताया गया कि वह करीब तीन महीने से लापता था। उसकी मौत से यह संकेत मिलते हैं कि उसे गंभीर यातनाएं दी गईं और संभवतः पाकिस्तान सेना की हिरासत में ही उसकी जान गई।
जानकारी के मुताबिक, गंज बख्श को 27 दिसंबर 2025 को गार्दाई कोलोवा सैन्य चौकी के पास से जबरन गायब कर दिया गया था। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया था।इसी बीच मानवाधिकार संगठन बलोच यकजहती कमिटी (BYC) ने भी दो अन्य नागरिकों की हत्या का मामला सामने रखा। संगठन के अनुसार, दिलावर खान और उनके साथी बिलाल अहमद को 4 मार्च की सुबह खारान जिले में पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड ने निशाना बनाया।

Balochistan Killings: बलूचिस्तान में लक्षित हत्याएं जारी
हमले में दिलावर खान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बिलाल अहमद गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना को बलूचिस्तान में लगातार हो रही लक्षित हत्याओं के एक और उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। यहां स्थानीय लोगों और शिक्षकों सहित कई नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर डर के माहौल में जी रहे हैं।
बीवाईसी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मामले पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। संगठन ने मांग की है कि घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाए।
संगठन ने यह भी बताया कि केच जिले के मिनाज़ इलाके में बलोची भाषा के गायक तलिब नज़ीर की 1 मार्च को उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि इस हमले को पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड ने अंजाम दिया।
संस्कृति बचाने वाले गायक की हत्या
बीवाईसी के अनुसार, तलिब नज़ीर ऐसे कलाकार थे जो अपनी गायकी के जरिए बलोची भाषा, संस्कृति और पहचान को जीवित रखने की कोशिश कर रहे थे। संगठन का कहना है कि राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड को ऐसे हमले करने के लिए संरक्षण दिया जा रहा है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यह घटना केवल एक कलाकार की हत्या नहीं है, बल्कि यह उस बढ़ते हिंसक पैटर्न का हिस्सा है जिसमें कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, छात्रों, महिलाओं और यहां तक कि बच्चों तक को निशाना बनाया जा रहा है।
बीवाईसी का आरोप है कि पाकिस्तानी अधिकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने के लिए प्रॉक्सी सशस्त्र समूहों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पूरे बलूचिस्तान में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
हत्याओं पर जवाबदेही की मांग
संगठन ने कहा कि जब किसी कलाकार को सिर्फ अपनी मातृभाषा में गाने के कारण उसके घर में गोली मार दी जाती है, तो यह वहां के लोगों पर हो रहे अत्याचार की गंभीरता को साफ दिखाता है। उनका कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों को चुप नहीं रहना चाहिए। जिम्मेदारी तय करना केवल मांग नहीं बल्कि कर्तव्य है।
बीवाईसी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर बलूचिस्तान की स्थिति पर तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पाकिस्तान को हत्याएं जारी रखने की खुली छूट मिल जाएगी और यह क्षेत्र लगातार हिंसा से जूझता रहेगा।






