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बलूचिस्तान में 40 घंटे का सैन्य ऑपरेशन, 145 लोगों की मौत से हिल गया पाकिस्तान

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने 40 घंटे का सैन्य अभियान चलाया, जिसमें 145 लोगों की मौत हुई। इसमें उग्रवादी, सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक शामिल हैं। हमलों की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है।
चालीस घंटे का सैन्य अभियान

Balochistan Security Operation: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने करीब 40 घंटे तक चला एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया, जिसमें कुल 145 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रांतीय मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बताया कि यह कार्रवाई बलूचिस्तान में हुए लगातार और आपस में जुड़े बंदूक व बम हमलों के जवाब में की गई।

उग्रवादियों और नागरिकों की मौत

पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के मुताबिक, इस अभियान में 92 उग्रवादी मारे गए। इसके अलावा, 15 आम नागरिकों की भी जान चली गई। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने भी इन आंकड़ों की पुष्टि की है।

मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने जानकारी दी कि इन हमलों में पुलिस और फ्रंटियर कोर सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के 17 जवानों की मौत हुई। साथ ही, पाकिस्तानी नौसेना के एक अधिकारी की भी जान गई। इस तरह कुल मिलाकर 31 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।

Balochistan Security Operation: चालीस घंटे का सैन्य अभियान
चालीस घंटे का सैन्य अभियान

Balochistan Security Operation: बलूचिस्तान में हिंसा चरम पर

दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत हाल के वर्षों में हिंसा की सबसे गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है और इसकी सीमाएं ईरान और अफगानिस्तान से लगती हैं। यहां सक्रिय विद्रोही समूहों ने हाल के समय में सुरक्षा बलों, आम नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले तेज कर दिए हैं।

आम नागरिक बने निशाना

पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि हमलावर आम नागरिकों के भेष में अस्पतालों, स्कूलों, बैंकों और बाजारों में घुसे और फिर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानों में काम कर रहे निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया और कई जगहों पर नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया। चौधरी ने कहा कि हर घटना में हमलावर आम लोगों की तरह आए और फिर अंधाधुंध हमला किया।

हमलों की जिम्मेदारी ली गई

इन सभी हमलों की जिम्मेदारी अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है। संगठन का दावा है कि उसने ‘हीरोफ’ या ‘काला तूफान’ नाम से एक संगठित अभियान चलाया, जिसके तहत पूरे बलूचिस्तान में सुरक्षाबलों को निशाना बनाया गया। बीएलए ने यह भी दावा किया है कि उसने 80 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को मार डाला और 18 को बंदी बना लिया।

पुराने विद्रोह की जड़ें

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे गरीब प्रांत माना जाता है। यहां दशकों से विद्रोह चल रहा है। बलूच समुदाय से जुड़े अलगाववादी समूह लंबे समय से अधिक स्वायत्तता और प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों में ज्यादा हिस्सेदारी की मांग करते रहे हैं। यह पुराना विवाद ही क्षेत्र में जारी हिंसा की एक बड़ी वजह माना जाता है।

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