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Bangladesh Election: बांग्लादेश में लोकतंत्र पर संकट? आवामी लीग ने चुनाव को बताया ‘मजाकिया’, अस्थिरता की दी चेतावनी

बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के बीच अवामी लीग ने चुनाव प्रक्रिया को दिखावटी बताते हुए हिंसा, धमकियों, अल्पसंख्यकों की असुरक्षा और लोकतंत्र के कमजोर होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
चुनाव के नाम पर दिखावा, लोकतंत्र पर गंभीर सवाल

Bangladesh Election Crisis: गुरुवार को बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हुआ। इसी बीच अवामी लीग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह देश को टूटने से बचाने के लिए आगे आए। पार्टी ने इन चुनावों को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र का वास्तविक रूप नहीं, बल्कि सिर्फ दिखावा है।

कट्टरपंथ विरोधी दल निशाने पर

अवामी लीग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सिर्फ अवामी लीग को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करना नहीं है, बल्कि उन अन्य राजनीतिक दलों को भी बाहर रखना है जो कट्टरपंथी विचारधाराओं का विरोध करते हैं और एक खुले व उदार बांग्लादेश का समर्थन करते हैं।

पार्टी ने आरोप लगाया कि अवामी लीग की विचारधारा से जुड़े लाखों मतदाताओं को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उन्हें डराया जा रहा है और सरकारी हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण कई लोगों को अपनी इच्छा के खिलाफ वोट देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अवामी लीग के अनुसार, यह सब जानबूझकर किया जा रहा है ताकि मतदान प्रतिशत बढ़ा हुआ दिखाया जा सके।

Bangladesh Election Crisis: चुनाव के नाम पर दिखावा, लोकतंत्र पर गंभीर सवाल
चुनाव के नाम पर दिखावा, लोकतंत्र पर गंभीर सवाल

Bangladesh Election Crisis: अमानवीय यातनाओं के गंभीर आरोप

अवामी लीग द्वारा जारी बयान में कहा गया कि इन तथाकथित चुनावों के दौरान भय का माहौल बना हुआ है। इसमें भीड़ की हिंसा, लिंचिंग और अमानवीय यातनाएं शामिल हैं। जेलों में बड़ी संख्या में अवामी लीग समर्थकों को बंद किया गया है। इसके साथ ही कई पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और युद्ध अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर झूठे हत्या के मामले लगाकर उन्हें जेल में डाला गया है।

चुनाव से पहले बढ़ता खतरा

पार्टी ने यह भी कहा कि अवामी लीग सरकार के हटने के बाद देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। चुनाव से पहले ही लाखों अल्पसंख्यक समुदाय के लोग खतरे में आ गए हैं। उन्हें अवामी लीग का समर्थक बताकर हत्या और हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है। महिलाओं की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है। पार्टी के अनुसार, महिलाएं जो मतदाताओं का लगभग आधा हिस्सा हैं, एक अनिश्चित और डरावने भविष्य की ओर देख रही हैं। उन्हें लोकतंत्र के नाम पर बनने वाली राष्ट्रीय नीतियों से भी दूर रखा जा रहा है, जो हालात को और गंभीर बनाता है।

दृश्य प्रमाणों से साजिश उजागर

अवामी लीग ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव लड़ने वाली पार्टियों द्वारा चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर के सबूत सामने आए हैं। जारी किए गए दृश्य प्रमाणों में साफ दिखता है कि चुनावी आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। पार्टी ने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां उस सामाजिक एकता को तोड़ देंगी, जो बांग्लादेश को अन्य देशों से अलग पहचान देती है।

अंतरिम सरकार पर निशाना साधते हुए अवामी लीग ने कहा कि रेफरेंडम के नाम पर यूनुस प्रशासन ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया और वोट के लिए प्रचार किया। पार्टी का कहना है कि यह जनता के फैसले पर भरोसा करने के बजाय पहले से नतीजे तय करने का संकेत है। अवामी लीग ने इस रेफरेंडम को पूरी तरह असंवैधानिक बताया और कहा कि इसका मकसद धर्मनिरपेक्षता को खत्म करना है। यह उसी संविधान को मिटाने की साजिश है, जो लाखों युद्ध नायकों के बलिदान से बना है और जिसने देश को पाकिस्तानी सेना के कब्जे से आजादी दिलाई थी।

टूटे वादों से बढ़ी देश की असुरक्षा

पार्टी ने विदेशी पर्यवेक्षकों और सभी अंतरराष्ट्रीय हितधारकों से मांग की कि वे इन चुनावों में सामने आ रही खामियों और खुले दुरुपयोग को ईमानदारी से दुनिया के सामने रखें। अवामी लीग ने चेतावनी दी कि यूनुस शासन के बड़े-बड़े बयानों पर भरोसा करना देश को लंबे समय तक अस्थिरता की ओर ले जाएगा। पार्टी के अनुसार, पिछले सत्रह महीनों में सरकार ने अपने वादों को तोड़ा है, जिससे बांग्लादेश एक असुरक्षित देश बन गया है और असहिष्णु संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।

इस बीच, देश में मतदान की प्रक्रिया जारी है। कुल 299 संसदीय सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं और मतदान समाप्त होते ही मतगणना शुरू कर दी जाएगी।

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