Bangladesh Election: बांग्लादेश में आज 12 फरवरी को आम चुनाव होने जा रहे हैं, यह चुनाव के साथ-साथ रेफ्रेंडम होगा, ऐसा बांग्लादेश के अंतरिम प्रशासक मुहमद युनुस का संदेश है। बांग्लादेश में जो उथल-पुथल हुई, उसमें नेशनल सिटिजन पार्टी का मुख्य हाथ है। यह छात्रों द्वारा फरवरी 2025 में खड़ी की गई पार्टी है। इस पार्टी ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटाकर देश से भागने को मजबूर किया। फिलहाल बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री भारत में शरण लिए हुई है। हसीना की चुनी हुई सरकार का अभी भी कार्यकाल बाकी है। लेकिन जो हिंसा का वातावरण बांग्लादेश में बना, उससे देश में अल्पसंख्यकों के साथ बुरा वर्ताव होने लगा। वे हिंदुओ को टारगेट करने लगे। चुनाव होने से दो दिन पूर्व ही 62 वर्षीय चावल के व्यापारी की हत्या कर दी गई। इस तरह का माहौल अल्पसंख्यक हिंदुओं को डराने धमकाने का है, ताकि वे चुनाव में मतदान करने से रोके जाएं। संाप्रदायिक माहौल बना कर कुछ शक्तियां बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। आनेवाले चुनाव के समय ढाका की स्थिति तनावपूर्ण होने वाली है।
शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी को अमान्य घोषित कर उसे चुनाव से दूर रखा हुआ है। इस कारण तनाव चरम सीमा पर है। जो पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं, वे हैं- बांग्ला देश नेशनल पार्टी, इसके प्रमुख हैं बेगम जिया के पुत्र तारिक रहमान, यह 10 पार्टियों के कोलेशन के साथ चुनाव में उतरी है। तीसरी पार्टी शफिकुर रहमान की जमाते इस्लाम पार्टी के साथ 11 पार्टियों का संगठन है। चैथी पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी फरवरी, 2025 में बनी, यह छात्रों की पार्टी है, इस पार्टी ने जमात के साथ संगठन बनाया है; इसी ने शेख हसीना को देश निकाला किया है। पांचवी पार्टी इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश पार्टी है और छटी पार्टी जतिया पार्टी है, इस पार्टी के तीन प्रधानमंत्री हुए हैं 1986 से 1990 के बीच।
बांग्लादेश की संसद में 350 सासद चुन कर आते हैं। इन्हीं में से 151 सांसद सरकार बनाने के लिए जरूरी होते हैं। कल के चुनाव में दो मत पत्र होंगे, जिसमें एक आम चुनाव के लिए होगा और दूसरा मत पत्र होगा संवैधानिक रिफ्रेंडम के लिए। यह 1991 के बाद पहली बार शेख हसीना को हटाने और खालिदा जिया की मृत्यु पर किया जा रहा है।
इस चुनाव में बंाग्लादेशी जो देश से बाहर रहते हैं, वह पोस्टल वोेट दे सकते हैं। 15 लाख के करीब बांग्लादेशी विदेश में रहते हैं; वे भी चुनाव में मत का प्रयोग कर सकते हैं। ‘नो’ वोट को भी चुनाव में सम्मिलित किया गया है।
बांग्लादेश के चुनाव में 1,981 कैंडिडेट खड़े हो रखे हैं, इसमें 1,518 कैंडिडेट पहली बार चुनाव में उठे हैं। ट्रंासपिरेंसी इटंरनेशनल के अनुसार 27 प्रतिशत प्रत्याशी 25 से 27 वर्ष के बीच के हैं। अब देखना यह है कि पड़ोसी देश किस तरह का रुख चुनाव के बाद भारत के साथ करता है। यह निर्भर करेगा कि सांप्रदायिकता को कैसे नई सरकार संभालती है ?
यह चुनाव दो सदनों का निर्माण करेगा। अभी तक एक ही सदन हुआ करता था। इसमें उच्च सदन में 100 सदस्य निर्वाचित किये जायेंगे।
प्रधानमंत्री सिर्फ दो बार ही बन सकता है, 10 वर्ष ही समय सीमा होगी। चुनाव आयोग को निष्पक्ष बनाने की कोशिश होगी। ज्युडिशियल एपवाइंटमेंट सिस्टम को बनाया जाएगा और राष्ट्रपति की शक्ति प्रधानमंत्री को चेक करने की एक कोशिश होगी। इस तरह से बांग्लादेश आगे काम करेगा; यह चुनाव इस रास्ते को तैयार करने की कोशिश में है।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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