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गृहयुद्व की ओर बांग्लादेश

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Bangladesh News: भारत विरोधी आंदोलन के चलते बांग्लादेश के खुलना, राजशाही में वीजा आवेदन केंद्र बंद किये गये। जबकि भारतीय उच्चायोग के एक अधिकारी ने बताया कि एक दिन बाद ही बांग्लादेश की राजधानी ढ़ाका में बीजा केंद्र का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया है।

भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद के मुख्य कारणों में अवैध शुसपैठ, सीमाा पर बाड़बंदी, जिसमें 150 गज के नियम को लेकर है, नदी जल बंटवारा तीस्ता फरक्का का, आतंकबाद और सुरक्षा की चिंताएं और व्यापार असंतुलन मुद्दे शामिल हैं। जो ऐतिहासिक और वर्तमान मुद्दे हैं। 1971 के बाद से लाखों बांग्लादेशी नागरिकों का अवैध रूप से भारत में प्रवेश, जिससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियां सामने आई हैं।स्ीमा पर बाड़ लगाने को लेकर असहमति भी है। भारत इसे सुरक्षा के रूप में देखता है, जबकि बांग्लदेश इसे समझौते का उलंघन मानता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में समझौते हुए हैं।
इसी तरह तीस्ता नदी के जल बंटवारे कों लेकर मनमुटाव है, क्योंकि शुष्क मौसम में बांग्लादेश में पानी घटने से वह चाहता है कि भारत नदी में और पानी छोड़े। इसी तरह से फरक्का बैराज से कम पानी छोड़ना भी है।

सुरक्षा और आतंकबाद बड़ा मुद्दा है, क्योंकि बांग्लदेश के रास्ते आतंकियों का भारत में प्रवेश करना आसान है। बांग्ला देश को चीन अपने ढ़ंग से सहायता कर रहा है, इसके बदले भारत के खिलाफ चीन दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बांग्लादेश पर भारत का प्रभाव घटता रहे। यानि भारत की सीमाओं को सुरक्षा की दृष्टि से कमजोर करना। वैसे भी चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता।

नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्ीय नागरिक रजिस्टर एनअीरसी-जैसे भारत के घरेलू मुद्दों ने बांग्लादेश में चिंतायें बढ़ाई हैं। इसके कारण राजनयिक संवेदनशीलता गरमाई है। हाल की जो घटनाएं हुई हैं, जिसमें बांग्लादेश के खुुलना और राजशाही में वीजा आवेदन केंद्र बंद करने पड़े।

बांग्ला देश का एक तपका, जो शेख हसीना का विरोध कर रहा है, वह चाहता है कि शेख हसीना को भारत बांग्लादेश को सौंपे। उन्हें लगता है कि भारत उसे बचा रहा है। लेकिन बांग्लादेश की अतंरिक घटनाओं में शेख हसीना की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर एक अवैध तरीके से बिना चुनाव के मोहमद यूनुस अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहा है। और उसी की सरकार में शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई गई है।

देखा जाय तो बांग्लादेश में सारे काम अवैधानिक रूप से हो रहे हैं। अभी भी मैंडेट शेख हसीना के पास है। आवामी लीग पार्टी का नेतृत्व उसी के पास है।
ऐसी प्रस्थितियां बांग्लादेश में है। आने वाले चुनाव में गृहयुद्व की जैसी स्थितियां हो सकती हैं। क्योंकि आवामी लीग पार्टी जिसका देश में बहुमत है, उस पार्टी को अवैध करार देकर चुनाव में भाग लेने से इनकार कर दिया है।

ये भी पढ़े… Bangladesh News: बांग्लादेश पर हिंसा और कट्टरपंथ का बढ़ता खतरा, देश को कहाँ ले जा रहे ये संगठन?

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