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बांग्लादेश में दिसंबर के दौरान हिंदू नागरिकों की हत्याएं,अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल

बांग्लादेश में दिसंबर महीने के दौरान चार हिंदू नागरिकों की अलग-अलग घटनाओं में हुई हत्याओं ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। ताजा मामला राजबाड़ी जिले का है, जहां 24 दिसंबर की रात अमृत मंडल पर कथित तौर पर भीड़ ने हमला किया। गंभीर रूप से घायल अमृत मंडल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 25 दिसंबर की तड़के इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

Bangladesh news: बांग्लादेश में दिसंबर महीने के दौरान चार हिंदू नागरिकों की अलग-अलग घटनाओं में हुई हत्याओं ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। इन मामलों में हत्या के तरीके अलग-अलग रहे, लेकिन सभी मृतकों की धार्मिक पहचान एक जैसी थी। मृतकों की पहचान अमृत मंडल, दीपू दास, जोगेश चंद्र रॉय और सुबर्णा रॉय के रूप में हुई है। घटनाएं रंगपुर, मायमनसिंह और राजबाड़ी जैसे अलग-अलग इलाकों में हुईं।

रंगपुर में बुजुर्ग दंपती की हत्या

जानकारी के अनुसार, 7 दिसंबर को रंगपुर में जोगेश चंद्र रॉय और उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की उनके घर के अंदर हत्या कर दी गई। दोनों के शव गले कटे हुए हालत में बरामद किए गए। जोगेश चंद्र रॉय 75 वर्ष के थे और बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े रहे थे, जबकि उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की उम्र 60 वर्ष बताई गई है। इस घटना के बाद इलाके में भय का माहौल देखा गया।

Bangladesh news: मायमनसिंह में दीपू दास की भीड़ द्वारा हत्या

18 दिसंबर को मायमनसिंह में दीपू दास की मौत का मामला सामने आया। आरोप है कि ईशनिंदा के आरोप लगाते हुए एक उग्र भीड़ उन्हें एक फैक्ट्री से पकड़कर ले गई और बाद में पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद उनके शव को सार्वजनिक स्थान पर लटकाया गया और आग लगाने की भी सूचना सामने आई। यह घटना कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

राजबाड़ी में अमृत मंडल की मौत

Bangladesh news: ताजा मामला राजबाड़ी जिले का है, जहां 24 दिसंबर की रात अमृत मंडल पर कथित तौर पर भीड़ ने हमला किया। गंभीर रूप से घायल अमृत मंडल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 25 दिसंबर की तड़के इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इन घटनाओं ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहा है। सवाल केवल अपराधियों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने में व्यवस्था की भूमिका क्या रही और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

 

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