Bengaluru News: दिसंबर 2025 की सुबह करीब 3:30 बजे, दक्षिण बेंगलुरु के बालाजी नगर में रहने वाले 34 वर्षीय मैकेनिक वेंकटरमनन को अचानक तेज सीने में दर्द हुआ। उनकी पत्नी ने तुरंत उन्हें बाइक पर बैठाकर पास के अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन पहले अस्पताल में डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे।
Bengaluru News: अस्पतालों की बेरुखी और इमरजेंसी में विफलता
इसके बाद पत्नी उन्हें दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले गईं, जहां ECG में माइल्ड हार्ट अटैक का पता चला। बावजूद इसके वहां भी तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट नहीं दिया गया और एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। डॉक्टरों ने उन्हें बड़े अस्पताल जाने की सलाह दी। मजबूर होकर पत्नी ने तीसरे अस्पताल की ओर बाइक पर ही रवाना होने का फैसला किया।
Bengaluru News: दर्दनाक सड़क हादसा और मदद की गुहार
रास्ते में अचानक एक्सीडेंट हो गया। वेंकटरमनन सड़क पर दर्द से तड़पते गिरे और उनकी पत्नी भी घायल हो गईं। खून से लथपथ पत्नी हाथ जोड़कर हर गुजरती गाड़ी और व्यक्ति से मदद मांगती रहीं, लेकिन कई मिनट तक कोई नहीं रुका। अंततः एक कैब ड्राइवर मदद के लिए रुका और उन्हें अस्पताल ले गया, लेकिन तब तक वेंकटरमनन को मृत घोषित कर दिया गया।
परिवार का दुख और इंसानियत का संदेश
वेंकटरमनन अपनी मां के अंतिम संतान थे। परिवार इस घटना से गहरे सदमे में है। उनकी मां ने कहा, “मेरे पास कहने को शब्द नहीं हैं। मेरा बेटा चला गया।” सास ने कहा, “सरकार को हेल्थ इमरजेंसी को समझना चाहिए। मेरी बहू दो छोटे बच्चों के साथ अकेली रह गई है। अब उनका पालन-पोषण कौन करेगा?”इस दुखद समय में परिवार ने बड़ा और इंसानियत भरा कदम उठाया और वेंकटरमनन की आंखें डोनेट कर दीं, जिससे दो लोगों को रोशनी मिली। पत्नी ने कहा, “इंसानियत नाकाम रही, लेकिन हमने अपना फर्ज निभाया।”यह घटना न केवल वेंकटरमनन के परिवार के लिए एक बड़ा आघात है, बल्कि बेंगलुरु में इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं की कमी और लोगों की उदासीनता पर भी गंभीर सवाल उठाती है। यह कहानी याद दिलाती है कि किसी की जान बचाने में समय और सहानुभूति कितनी अहम होती है।
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