BIHAR ELECTION: कभी नक्सली हिंसा का गढ़ रहे बिहार के जमुई जिले के चोरमारा गांव में आज लोकतंत्र का सबसे सुंदर दृश्य देखने को मिला। वो गांव, जहाँ कभी बुलेट की गूंज थी, आज बैलेट की घंटियां बज रही हैं। 21 साल बाद यहां मतदान केंद्र फिर से बना , और इस बार लोगों ने न सिर्फ वोट दिया, बल्कि लोकतंत्र का उत्सव मनाया।
कमांडर के बेटे ने सजाया मतदान केंद्र

BIHAR ELECTION: वर्ष 2007 में जिस स्कूल को नक्सली कमांडर बालेश्वर कोड़ा ने डायनामाइट से उड़ाया था,आज उसी स्कूल में उसके बेटे संजय कोड़ा ने मतदान केंद्र को “दुल्हन की तरह” सजाया।
विरोध का अंत हुआ
BIHAR ELECTION: उसकी मां मंगनी देवी उर्फ गीता ने गांव की महिलाओं के साथ घर-घर जाकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया। यह दृश्य न सिर्फ विरोध के अंत का, बल्कि विश्वास की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
लोकतंत्र का उदाहरण
BIHAR ELECTION: बरहट प्रखंड का चोरमारा गांव घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा है- जहाँ कभी नक्सलियों का बड़ा कैंप हुआ करता था। 2004 के बाद से यहां के मतदाता भय के साये में वोट नहीं डाल सके। लोगों को 20 किलोमीटर पैदल चलकर मतदान करने जाना पड़ता था। लेकिन इस बार प्रशासन की सतर्कता और सुरक्षा के भरोसे ने गांव की तस्वीर बदल दी।
महिलाओं की सबसे बड़ी भागीदारी
BIHAR ELECTION: इस बार सबसे ज़्यादा उत्साह गांव की महिलाओं में देखा गया। वे सुबह से कतार में खड़ी होकर वोट डालने पहुँचीं।कई बुजुर्ग महिलाएं कहती दिखीं “पहले डर था, अब भरोसा है, ये वोट हमारी आज़ादी है।”
लोकतंत्र के रंग में रंगा चोरमारा
BIHAR ELECTION: एक तरफ जले हुए स्कूल की दीवारें गवाही दे रही थीं कि हिंसा क्या थी, दूसरी ओर रंगीन झंडे और मुस्कुराते चेहरे बता रहे थे कि उम्मीद क्या है। गांव के लोगों के लिए यह मतदान सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि स्वाभिमान की वापसी है।
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