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पत्नी की अर्थी से पहले पति ने भी तोड़ा दम, मुंगेर में एक साथ उठी पति-पत्नी की शवयात्रा

कहते हैं जब प्यार जीवन भर साथ निभाता है, तो मौत भी उन्हें जुदा नहीं कर पाती। बिहार के मुंगेर से सामने आई एक मार्मिक घटना ने इसी कहावत को सच कर दिखाया। विश्वनाथ सिंह एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे और विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज, मुंगेर में प्रोफेसर भी रह चुके थे। उन्होंने कानून के क्षेत्र में कई छात्रों को शिक्षा दी, जो आज मुंगेर न्यायालय में वकालत कर रहे हैं। उनकी शादी वर्ष 1961 में भागलपुर जिले के शाहपुर निवासी अहिल्या देवी से हुई थी।

Bihar news: कहते हैं जब प्यार जीवन भर साथ निभाता है, तो मौत भी उन्हें जुदा नहीं कर पाती। बिहार के मुंगेर से सामने आई एक मार्मिक घटना ने इसी कहावत को सच कर दिखाया। यहां पत्नी की शवयात्रा निकलने से ठीक पहले पति ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बाद दोनों की एक साथ शवयात्रा निकली और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दृश्य ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

क्या है पूरा मामला?

मुंगेर जिले के लल्लू पोखर मोहल्ले में मंगलवार को यह हृदयविदारक घटना सामने आई। मुंगेर व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर विश्वनाथ सिंह की 82 वर्षीय पत्नी अहिल्या देवी का निधन सोमवार दोपहर हो गया था। परिवार शोक में डूबा हुआ था और मंगलवार को उनकी शवयात्रा निकालने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान अचानक 87 वर्षीय विश्वनाथ सिंह की तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने भी दम तोड़ दिया। पत्नी के निधन के अगले ही दिन पति के निधन की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

Bihar news: इलाके में शोक का माहौल

विश्वनाथ सिंह के निधन की सूचना मिलते ही आसपास के लोग और मुंगेर न्यायालय के कई वरिष्ठ अधिवक्ता उनके घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। इसके बाद पति-पत्नी की एक साथ शवयात्रा निकाली गई और दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। यह दृश्य देख हर कोई भावुक हो गया।

जानें मृतकों के बारे में

Bihar news: विश्वनाथ सिंह एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे और विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज, मुंगेर में प्रोफेसर भी रह चुके थे। उन्होंने कानून के क्षेत्र में कई छात्रों को शिक्षा दी, जो आज मुंगेर न्यायालय में वकालत कर रहे हैं। उनकी शादी वर्ष 1961 में भागलपुर जिले के शाहपुर निवासी अहिल्या देवी से हुई थी। दंपती के तीन पुत्र और दो पुत्रियां हैं। बड़े पुत्र शैलेश कुमार शिक्षक हैं, दूसरे पुत्र विभेष कुमार अधिवक्ता हैं और तीसरे पुत्र राकेश कुमार बैंक से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शैलेश कुमार ने बताया कि मां का निधन सोमवार को हुआ था और मंगलवार को उनकी शवयात्रा निकलनी थी, लेकिन उससे पहले ही पिता भी चल बसे। ऐसे में दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। पति-पत्नी की एक साथ शवयात्रा और अंतिम विदाई ने पूरे मोहल्ले और इलाके को गमगीन कर दिया। नम आंखों से लोगों ने दोनों को अंतिम विदाई दी।

 

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