Blood Moon Eclipse: 3 मार्च 2026 की रात आसमान में एक ऐसा नज़ारा दिखेगा जो हर बार लोगों को हैरान कर देता है पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे या खूनी लाल रंग में नजर आएगा. इसे ही लोकप्रिय भाषा में ब्लड मून कहा जाता है. लेकिन क्या सच में चांद लाल हो जाता है या ये सिर्फ नजरों का खेल है? इसका जवाब पूरी तरह विज्ञान में छिपा है.
धरती–सूरज–चांद एक लाइन में, तभी बनता है ग्रहण
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. हर पूर्णिमा पर ऐसा नहीं होता क्योंकि चंद्रमा की कक्षा थोड़ी झुकी हुई है.इसी वजह से साल में कुछ ही बार ये अद्भुत खगोलीय घटना देखने को मिलती है. 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होगा, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण है.
Blood Moon Eclipse: क्यों लाल दिखता है चंद्रमा? यही है असली साइंस
जब पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाता है, तब भी वह पूरी तरह गायब नहीं होता.सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है और मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है. नीली और बैंगनी रोशनी रास्ते में बिखर जाती है लाल और नारंगी रोशनी सीधे चंद्रमा तक पहुंचती है इसी वजह से चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखता है.जितनी ज्यादा धूल या धुआं वातावरण में होगा, उतना गहरा लाल रंग दिखाई देगा. यही प्रभाव सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान को लाल बनाता है.
Blood Moon Eclipse: पूर्ण, आंशिक और पेनम्ब्रल—तीन तरह के चंद्र ग्रहण
पूर्ण चंद्र ग्रहण: पूरा चांद धरती की गहरी छाया में, और बनता है ब्लड मून आंशिक ग्रहण: चंद्रमा का सिर्फ एक हिस्सा छाया मेंपेनम्ब्रल ग्रहण: हल्की छाया, चंद्रमा बस धुंधला सा दिखता है
2026 में 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जबकि 28 अगस्त को आंशिक ग्रहण देखने को मिलेगा.
मिथक vs विज्ञान: डर नहीं, सिर्फ अद्भुत नज़ारा
इतिहास में ब्लड मून को कई बार अशुभ संकेत माना गया युद्ध, आपदा या संकट से जोड़ा गया. लेकिन आधुनिक विज्ञान साफ कहता है: यह पूरी तरह प्राकृतिक, सुरक्षित और पहले से अनुमानित खगोलीय घटना है.इसका धरती या इंसानों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता 3 मार्च की रात साफ आसमान मिला तो बिना किसी टेलीस्कोप के भी यह नज़ारा देखा जा सकता है.जब चांद लाल दिखे, तो समझिए आप प्रकृति के सबसे शानदार वैज्ञानिक शो के लाइव दर्शक हैं.
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