Braj ki Holi: ब्रजभूमि में होली का रंग इस वर्ष कुछ अलग ही नजर आया। श्रद्धा, प्रेम और परंपरा के संगम ने मथुरा-वृंदावन को भक्ति के रंगों से सराबोर कर दिया। एक ओर वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में रंगभरनी एकादशी पर रंगों की होली का शुभारंभ हुआ, तो दूसरी ओर श्री कृष्ण जन्म स्थान में भव्य लट्ठमार होली ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस अलौकिक उत्सव के साक्षी बनने ब्रजधाम पहुंचे।
इतिहास में पहली बार: बांके बिहारी जी के लाइव दर्शन
रंगभरनी एकादशी के पावन अवसर पर पहली बार सुबह 7 बजे से श्री बांके बिहारी मंदिर में लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत हुई। दोपहर 1 बजे से मंदिर के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लाइव दर्शन प्रारंभ कर दिए गए।अब श्रद्धालु घर बैठे अपने आराध्य श्री बांके बिहारी जी के दर्शन कर सकते हैं। इस व्यवस्था की तैयारी कई दिनों से चल रही थी।मंदिर परिसर में रंग-गुलाल, फूलों और व्यंजनों की होली ने वातावरण को और भी आनंदमय बना दिया। एकादशी के कारण परिक्रमा मार्ग पर भी लाखों श्रद्धालु भक्ति भाव से परिक्रमा करते नजर आए।पूरा वृंदावन राधे-राधे के जयकारों और रंगों की फुहारों से गूंज उठा।
Braj ki Holi: मथुरा में लट्ठमार होली का भव्य महोत्सव
धर्म नगरी मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्म स्थान पर लट्ठमार होली का शुभारंभ राधा-कृष्ण स्वरूप की आरती के साथ हुआ। होली के पारंपरिक लोकगीतों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।मंच पर कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, फूलों की होली खेली गई और हाइड्रोलिक पिचकारियों से रंग-गुलाल की वर्षा हुई। इसके बाद मैदान में लट्ठमार होली की शुरुआत हुई, जहां नवयुवक कृष्ण और गोपियों के स्वरूप में होली खेलते नजर आए।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस अद्भुत दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई।
Braj ki Holi: आस्था, प्रेम और परंपरा का संगम
ब्रज की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और सदियों पुरानी परंपराओं का प्रतीक है।पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।मथुरा-वृंदावन की गलियों में इस समय केवल एक ही रंग छाया है भक्ति का रंग, जो हर वर्ष की तरह इस बार भी भक्तों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।ब्रज की होली जहां रंगों में बसती है राधा-कृष्ण की भक्ति।
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