Budget 2026: राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने मुजफ्फरनगर में मीडिया से बातचीत में केंद्रीय बजट 2026 पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कृषि बजट में इजाफे का स्वागत तो किया लेकिन सवाल उठाया कि यह पैसा आखिर कहां जाएगा। छोटे किसानों की उम्मीदें टूटीं क्योंकि किसान सम्मान निधि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। एमएसपी गारंटी कानून की मांग फिर लटकी रही जबकि दूध उत्पादन पर घोषणाओं को वे अपूर्ण मानते हैं। टिकैत का कहना है कि बजट किसानों की जमीनी समस्याओं से कोसों दूर है।
किसान सम्मान निधि पर सबसे ज्यादा निराशा
कृषि बजट को लेकर टिकैत ने कहा हां बजट बढ़ाया गया है लेकिन इसका आकार और आवंटन देखना बाकी है। क्या यह ग्रामीण सड़कों अस्पतालों और शिक्षा पर खर्च होगा, या छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मिलेगा उन्होंने चेतावनी दी कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत करने के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी जरूरी है। 2027 तक सख्ती से लागू हो तभी ग्रामीण विकास जुड़ेगा उन्होंने जोर दिया। छोटे उद्योगों और किसान-युवाओं द्वारा लगाए जाने वाले धंधों को फायदा न पहुंचने पर भी नाराजगी जताई। किसान सम्मान निधि पर सबसे ज्यादा निराशा है। टिकैत बोले हम उम्मीद कर रहे थे कि 6 हजार से बढ़ाकर 12 हजार किया जाएगा महंगाई को देखते हुए। छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बजट में यह राशि वही रही। दूध क्षेत्र पर सरकार की पहल उत्पादन बढ़ाना पशु चिकित्सा सुधार को वे सराहते हैं लेकिन सवाल उठाते हैं नकली दूध का क्या देश में नकली दूध बनता रहेगा विदेशी ड्राई मिल्क पाउडर आयात होता रहेगा तो असली उत्पादकों का नुकसान कैसे पूरा होगा फीड और चारा पर सब्सिडी क्यों नहीं?
Budget 2026: टिकैत ने की ये मांग
बीज कानून का जिक्र आया तो टिकैत ने विरोध जताया। यह कंपनी राज लाएगा। नकली बीजों पर नियंत्रण नहीं फसलें खराब हो रही हैं खेत बर्बाद हो रहे। फसल बीमा योजना नाममात्र की है। उदाहरण देते हुए कहा सिरसा में चार दिन पहले देखा दिल्ली का केमिकल युक्त औद्योगिक पानी झज्जर-गुड़गांव के घग्गर नदी से बहकर फसलों को तबाह कर रहा। जलभराव आज भी समस्या है। 40 किलो के खाद कट्टे पर छूट न मिलने से किसानों को राहत नहीं। टिकैत ने मांगों पर जोर दिया हर साल लिखकर देते हैं यह हमारा हक है। किसान आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। युवाओं के लिए खेल स्टेडियम गांव-गांव में चाहिए लेकिन हरियाणा जैसे राज्यों के अलावा कहीं सुविधा नहीं। सरकार अच्छी-अच्छी बातें कहेगी ही लेकिन जमीनी काम स्टेट गवर्नमेंट ही कर रही। कुल मिलाकर बजट ने किसानों को आंशिक संतुष्टि दी लेकिन जड़ें मजबूत करने वाली नीतियां गायब रहीं। टिकैत की आवाज किसान असंतोष की गूंज बन गई है।







