Buisness news: उद्योगपति Anil Ambani की कानूनी परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। Central Bureau of Investigation (CBI) ने उनके और उनकी कंपनी Reliance Communications (RCOM) के खिलाफ 2,200 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज किया है। यह केस Bank of Baroda की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत के बाद CBI ने अनिल अंबानी और RCOM से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया। इससे पहले भी State Bank of India (SBI) समेत 11 बैंकों के कंसोर्टियम की शिकायत पर एजेंसी कंपनी के खिलाफ जांच कर रही है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत में क्या है आरोप?
CBI के बयान के मुताबिक, बैंक ऑफ बड़ौदा ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने 2,200 करोड़ रुपये से अधिक की रकम में धोखाधड़ी की। FIR में IPC और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक कदाचार और पद के दुरुपयोग जैसी धाराएं लगाई गई हैं। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने लोन की रकम का तय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया। इसके लिए कंपनी के खातों में कथित तौर पर हेराफेरी भी की गई।
Buisness news: हाईकोर्ट की रोक हटने के बाद हुई कार्रवाई
CBI प्रवक्ता के अनुसार, संबंधित लोन खाते को साल 2017 में ही NPA घोषित कर दिया गया था। हालांकि, अनिल अंबानी की याचिका पर Bombay High Court ने खातों को फ्रॉड घोषित करने पर रोक लगा दी थी। 23 फरवरी 2026 को यह रोक हटा ली गई। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और CBI ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। फिलहाल कंपनी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Buisness news: 31,580 करोड़ के लोन पर सवाल
शिकायत में कहा गया है कि RCOM, रिलायंस इन्फ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम ने मिलकर बैंकों से कुल 31,580 करोड़ रुपये का लोन लिया था। आरोप है कि: 6,265.85 करोड़ रुपये दूसरे बैंकों का कर्ज चुकाने में खर्च किए गए, 5,501.56 करोड़ रुपये संबंधित पार्टियों को ट्रांसफर किए गए, 3,674.85 करोड़ रुपये एफडी और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें बाद में भुना लिया गया, जांच एजेंसियों का दावा है कि इस तरह लोन की शर्तों का पालन नहीं किया गया।
ED के सामने भी पेश हुए अनिल अंबानी
Buisness news: इसी बीच, अनिल अंबानी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अन्य मामले में Enforcement Directorate (ED) के सामने पेश हुए। उनसे PMLA के तहत बयान दर्ज किया गया। यह जांच कथित तौर पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ी बताई जा रही है। अगस्त 2025 में भी उनसे पूछताछ की गई थी।
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