Canada news: कनाडा में भारतीय मूल के एक कैब ड्राइवर की इंसानियत और सूझबूझ की चर्चा इन दिनों पूरे देश में हो रही है। ठंड से जमी एक रात में उन्होंने न सिर्फ एक गर्भवती महिला और उसके साथी को समय पर अस्पताल पहुंचाया, बल्कि रास्ते में जन्मे बच्चे की जान भी सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना कैलगरी की है, जहां टैक्सी ड्राइवर हरदीप सिंह तूर ने एक इमरजेंसी कॉल पर प्रतिक्रिया दी। उन्हें बताया गया था कि अस्पताल के लिए तुरंत कैब की जरूरत है। जब वे मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक गर्भवती महिला दर्द से कराह रही थी और उसका साथी उसे किसी तरह संभालकर टैक्सी में बैठा रहा था।
हालात की गंभीरता तुरंत समझ गए ड्राइवर
हरदीप सिंह तूर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि महिला की हालत देखकर उन्हें तुरंत स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हो गया था। उन्होंने कहा कि पहले उनके मन में एम्बुलेंस बुलाने का ख्याल आया, लेकिन मौसम बेहद खराब था और समय भी बहुत कम था। महिला की बॉडी लैंग्वेज साफ बता रही थी कि बच्चे के जन्म का वक्त आ चुका है। इसी को देखते हुए तूर ने बिना देर किए टैक्सी को अस्पताल की ओर मोड़ दिया।
Canada news: –23 डिग्री तापमान और बर्फीली सड़कों के बीच संघर्ष
यह सफर तूर के लिए अब तक की सबसे लंबी 30 मिनट की ड्राइव बन गया। बाहर तापमान करीब –23 डिग्री सेल्सियस था, तेज ठंड, फिसलन भरी सड़कें और ट्रैफिक सिग्नल हर पल चुनौती बन रहे थे। पीछे की सीट से महिला की चीखें और दर्द की आवाजें माहौल को और तनावपूर्ण बना रही थीं। तूर का कहना है कि उस वक्त उनका पूरा ध्यान बस एक ही बात पर था, किसी भी तरह मां और बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना।
Canada news: कैब में ही हुआ बच्चे का जन्म
अस्पताल पहुंचने से कुछ मिनट पहले अचानक पीछे से आवाजें आनी बंद हो गईं। तभी तूर को एहसास हुआ कि कैब में ही बच्चे का जन्म हो चुका है। उन्होंने बिना रुके गाड़ी अस्पताल तक पहुंचाई। जैसे ही टैक्सी अस्पताल के बाहर रुकी, मेडिकल स्टाफ तुरंत दौड़कर आया और महिला व नवजात शिशु को अंदर ले गया। बाद में डॉक्टरों ने बताया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
“दो लोग बैठे थे, तीन लोग अस्पताल पहुंचे”
Canada news: हरदीप सिंह तूर ने इस अनुभव को अपने जीवन का सबसे यादगार पल बताया। उन्होंने कहा, “मैं चार साल से टैक्सी चला रहा हूं, लेकिन यह पहली बार हुआ जब दो लोग मेरी कैब में बैठे और तीन लोग बाहर निकले।” आज हरदीप सिंह तूर की यह कहानी सिर्फ एक कैब ड्राइवर की नहीं, बल्कि इंसानियत, जिम्मेदारी और सही समय पर लिए गए फैसले की मिसाल बन चुकी है।
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