Census 2026: भारत में जनगणना-2026 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने कुल 33 सवाल जारी किए हैं। इनमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई लिव-इन कपल अपने रिश्ते को स्थिर और लंबा चलने वाला मानता है, तो उन्हें भी शादीशुदा माना जाएगा। पहले चरण के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जहाँ लोग अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इस पोर्टल पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) भी उपलब्ध हैं, जिससे लोगों को प्रक्रिया समझने में आसानी होगी।
पहले चरण को ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार भविष्य में बेहतर योजनाएँ तैयार कर सके। दूसरे चरण में आबादी से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी।

संदर्भ तिथि का महत्व
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण का कहना है कि जनगणना की संदर्भ तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस बार यह तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात रखी गई है। इसी दिन के आधार पर जनगणना के सभी आंकड़े तैयार किए जाएंगे। 16 जून 2025 को जारी पहली अधिसूचना में भी इस संदर्भ तिथि का उल्लेख किया गया था, और इसी कारण इसे जनगणना 2027 कहा जाता है। इस तिथि के आधार पर हर राज्य, जिला, गांव और वार्ड की स्थिति का सटीक आंकड़ा उपलब्ध होगा।
भारत में जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाती है। पहला चरण, यानी हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना, घरों की सूची तैयार करने और उनकी गिनती करने पर केंद्रित होता है।
Census 2026: पहला चरण कब और कैसे होगा
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 8 जनवरी 2026 को बताया कि पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने क्षेत्र में यह काम 30 दिनों के भीतर समाप्त करेंगे। इसके अलावा, सरकार ने यह सुविधा भी दी है कि घरों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोग स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं (Self Enumeration)। यह प्रक्रिया कोरोना महामारी के कारण स्थगित हुई जनगणना 2021 की जगह अब 2027 में पूरी की जाएगी।

पूरी जनगणना होगी डिजिटल
इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। लगभग 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रीयल-टाइम डेटा ट्रांसफर की वजह से यह प्रक्रिया लगभग पेपरलेस हो जाएगी। यह एप्लिकेशन Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर काम करेंगे।
इस बार जाति संबंधी जानकारी भी डिजिटल रूप में जुटाई जाएगी। यह आजादी के बाद पहली बार होगा जब जाति की गिनती डिजिटल माध्यम से होगी। इससे पहले अंग्रेज़ों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना होती रही थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल 2026 में लिया था। पिछली जनगणना 2011 के अनुसार भारत की आबादी लगभग 121 करोड़ थी, जिसमें 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं।
Census 2026: डिजिटल मैप और इसके लाभ
जनगणना में हर घर को डिजी डॉट के रूप में जियो-टैग किया जाएगा, जिससे एक डिजिटल लेआउट तैयार होगा। यह मैप कई तरह से उपयोगी साबित होगा। आपदा जैसे बाढ़, भूकंप या बादल फटने की स्थिति में यह मैप राहत कार्यों में मदद करेगा और यह पता लगाया जा सकेगा कि किन घरों में कितने लोग रहते हैं। राजनीतिक परिसीमन और संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण युक्तिसंगत तरीके से किया जा सकेगा।
शहरी योजना में भी यह मैप अहम भूमिका निभाएगा। किसी इलाके में बच्चों की संख्या अधिक होगी तो वहां प्राथमिकता से स्कूल और पार्क बनाए जा सकेंगे। वहीं यदि किसी क्षेत्र में कमजोर या कच्चे मकान अधिक होंगे, तो वहां आपातकालीन मेडिकल सहायता भेजी जा सकेगी। डिजिटल मैप के जरिए शहरीकरण और पलायन की दरों का सटीक डेटा उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य की जनगणना में बदलाव आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। इसके अलावा, आधार और जियो-टैगिंग की मदद से मतदाता सूची सटीक बनेगी और डुप्लीकेट नामों को हटाने में आसानी होगी।







