Chandra Grahan 2026: एनसीआर में चंद्रग्रहण को लेकर लोगों में गहरी धार्मिक आस्था और परंपराओं का प्रभाव साफ दिखाई दिया। जैसे ही चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हुआ, वैसे ही क्षेत्र के बड़े मंदिरों के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।

सूतक में बंद हुए मंदिर
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है। इसी कारण इस अवधि में मंदिरों में नियमित पूजा, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं। मंदिर प्रबंधन समितियों ने बताया कि सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ मंदिरों के कपाट बंद किए गए।
मंदिरों में मौजूद श्रद्धालुओं से विनम्रता से अनुरोध किया गया कि वे सूतक काल की मान्यताओं का सम्मान करें और इस दौरान घर पर ही भजन-कीर्तन और पूजा करें। कई मंदिरों में मंगलवार सुबह होने वाली आरती तय समय से पहले ही पूरी कर ली गई। इसके बाद पूरे मंदिर परिसर को खाली करा दिया गया।

Chandra Grahan 2026: शाम सात बजे खुलेंगे मंदिर
धार्मिक विश्वास के अनुसार चंद्रग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इस कारण देवी-देवताओं की मूर्तियों को कपड़े से ढक दिया जाता है और पूजा से जुड़ी सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है। सूतक काल के दौरान मंदिरों में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि नहीं की जाती।
मंदिर प्रबंधन ने जानकारी दी कि चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद शाम 7 बजे के बाद मंदिरों के दरवाजे दोबारा खोले जाएंगे। इसके बाद मंदिर की पूरी तरह साफ-सफाई की जाएगी। शुद्धिकरण के लिए गंगाजल का छिड़काव किया जाएगा, धूप-दीप जलाए जाएंगे और विशेष मंत्र पढ़े जाएंगे। इसके बाद विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु शामिल हो सकेंगे।
प्रशासन और मंदिर समितियों ने लोगों से अपील की है कि वे चंद्रग्रहण और सूतक से जुड़ी परंपराओं का सम्मान करें। साथ ही भीड़ से बचते हुए तय समय के बाद ही मंदिर पहुंचें। एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में चंद्रग्रहण को लेकर आस्था और उत्साह का माहौल बना हुआ है।
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