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काम के आगे मैनेजर ने किया रिश्तों का कत्ल बीमार मां को ‘वृद्धाश्रम’ भेजने की दे डाली सलाह!

ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक निजी बैंक में काम करने वाली महिला कर्मचारी को अपनी बीमार मां की सेवा करने के बदले मैनेजर की कड़वी बातों और संवेदनहीनता का सामना करना पड़ा।
Corporate insensitivity: काम के आगे मैनेजर ने किया रिश्तों का कत्ल बीमार मां को 'वृद्धाश्रम' भेजने की दे डाली सलाह!

Corporate insensitivity: आज के दौर में वर्क-लाइफ बैलेंस और कॉरपोरेट वर्क कल्चर पर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक निजी बैंक में काम करने वाली महिला कर्मचारी को अपनी बीमार मां की सेवा करने के बदले मैनेजर की कड़वी बातों और संवेदनहीनता का सामना करना पड़ा।

Corporate insensitivity: क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर ‘Mr_Moulick’ नामक यूजर ने इस दुखद वाकये को साझा किया है। पोस्ट के अनुसार, महिला की मां की हालत गलत दवा के सेवन के कारण काफी गंभीर हो गई थी। ऐसी स्थिति में एक बेटी होने के नाते महिला ने दफ्तर से छुट्टी मांगी ताकि वह अपनी मां की देखभाल कर सके।

Corporate insensitivity: मैनेजर का विवादित और संवेदनहीन बयान

जब महिला कर्मचारी ने अपनी परेशानी मैनेजर के सामने रखी, तो मदद और सहानुभूति के बजाय उसे बेहद चौंकाने वाली सलाह मिली। मैनेजर ने कथित तौर पर कहा कि अगर उनकी मां की तबीयत में सुधार नहीं हो रहा है, तो उन्हें किसी वृद्धाश्रम में छोड़ दो। और अपने काम पर आओ। आपको बता दे कि महिला कर्मचारी ने अपनी मां के साथ रहना चुना है। इस महिला कर्मचारी ने इस ऑफिस के लिए दिन रात मेहनत की।

आहत कर्मचारी ने दिया इस्तीफा

मैनेजर के इस रवैये ने महिला को मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया। अपनी मां के प्रति ऐसी संवेदनहीन टिप्पणी सुनने के बाद महिला ने उस संस्थान में काम करना उचित नहीं समझा और तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई है। लोग कॉरपोरेट जगत के ‘टॉक्सिक वर्क कल्चर‘ की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि कंपनियों के लिए कर्मचारी केवल एक ‘नंबर’ बनकर रह गए हैं, जहाँ उनकी भावनाओं और पारिवारिक संकटों की कोई जगह नहीं है।

निष्कर्ष: यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस दौड़ में अपनी संवेदनाएं खोते जा रहे हैं? किसी भी पेशेवर जिम्मेदारी से ऊपर माता-पिता की सेवा और मानवीय मूल्य होने चाहिए।

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