DELHI BLAST: फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद के बाद चर्चाओं में आए सिद्दीकी परिवार के महू स्थित पैतृक मकान को लेकर जारी कानूनी मामले में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामला उस नोटिस से जुड़ा है, जिसे कैंटोनमेंट बोर्ड ने कथित अवैध निर्माण हटाने के आधार पर जारी किया था। इस नोटिस को मकान में रह रहे अब्दुल मजीद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
जारी नोटिस कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय बागड़िया ने तर्क दिया कि मकान के मूल स्वामी हम्माद अहमद का निधन हो चुका है और उन्होंने अपने जीवनकाल में ही एक विधिवत गिफ्ट डीड के माध्यम से यह संपत्ति अब्दुल मजीद के नाम कर दी थी।
ऐसे में, मजीद ही इस संपत्ति के वर्तमान वैध स्वामी हैं। अधिवक्ता के अनुसार, इस स्थिति में कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा जारी नोटिस कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि नोटिस में न तो अवैध निर्माण की सीमा स्पष्ट की गई और न ही यह बताया गया कि किस हिस्से को अतिक्रमण माना गया है।
DELHI BLAST: सुको के अनुसार 15 दिन की नोटिस देना अनिवार्य
अधिवक्ता बागड़िया ने यह भी बताया कि वर्ष 1996 और 1997 में भी इसी प्रकार के नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई गई। ऐसे में अचानक तीन दिनों के भीतर ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करना अनुचित है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2025 में जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी ध्वस्तीकरण या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पूर्व न्यूनतम 15 दिन की नोटिस अवधि देना अनिवार्य है। केवल तीन दिन का समय देना इन निर्देशों का उल्लंघन है।
DELHI BLAST: हाईकोर्ट की अंतरिम मोहलत
मामले की जटिलता और प्रस्तुत दस्तावेजों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपना विस्तृत पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय प्रदान किया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कैंटोनमेंट बोर्ड इस अवधि के दौरान कोई नया आदेश पारित करता है, तो याचिकाकर्ता को उसे चुनौती देने के लिए अतिरिक्त 10 दिन की मोहलत दी जाएगी।
अधिवक्ता ने अदालत को यह भी साफ किया कि गिफ्ट डीड के बाद संपत्ति का हम्माद अहमद से कोई संबंध नहीं है और यह पूर्णतः अब्दुल मजीद के नाम पर है। मामले की अगली सुनवाई नियत तिथि पर होगी।
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