DELHI NEWS: हाल ही में पकड़े गए एक आतंकी मॉड्यूल की जांच ने राष्ट्रीय एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण दिशा में पहुंचा दिया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल दो संदिग्ध—डॉ. आदिल और डॉ. मुजम्मिल अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे, जिसने एजेंसियों का ध्यान इस विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर केंद्रित कर दिया है।
यूनिवर्सिटी से जुड़े तीसरे व्यक्ति की भी जांच
DELHI NEWS: सूत्रों का कहना है कि दोनों आरोपियों ने विश्वविद्यालय परिसर के लैब में संदिग्ध प्रयोग किए थे। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन गतिविधियों से अवगत था या नहीं। जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. शाहिद, जो कुछ समय पहले इसी संस्थान से जुड़े हुए थे, कथित तौर पर इस मॉड्यूल के संपर्क में थे। सुरक्षात्मक एजेंसियों ने उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स, यात्रा इतिहास और संपर्कों की पड़ताल शुरू कर दी है।
क्या संस्थान का दुरुपयोग हुआ?
DELHI NEWS: जांच अधिकारियों का कहना है कि जिस प्रकार प्रयोगशाला के उपकरणों और रसायनों का इस्तेमाल किया गया, उससे यह संभावना बनती है कि आरोपियों ने शैक्षणिक संसाधनों का गलत उपयोग कर अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया हो। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, फिलहाल यह जांच का विषय है कि विश्वविद्यालय के माहौल का दुरुपयोग किया गया या किसी को इसके बारे में जानकारी थी।
प्रशासन की सफाई
DELHI NEWS: अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने किसी भी आतंकी गतिविधि में संस्थान की भूमिका से इनकार किया है। विश्वविद्यालय प्रवक्ता ने कहा—
हम जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति ने संस्थान का गलत इस्तेमाल किया है, तो वह व्यक्तिगत कार्रवाई है, न कि संस्थान की नीति।
इस्लाम के नाम पर स्थापित संस्था पर सवाल क्यों?
DELHI NEWS: जांच एजेंसियों व फरीदाबाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संस्थान के नाम या धार्मिक पहचान को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आरोप व्यक्तियों पर हैं, न कि शिक्षा संस्थान या सम्पूर्ण समुदाय पर। वहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।वे जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह देते हैं।
आगे क्या?
DELHI NEWS: NIA और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम डिजिटल साक्ष्यों, लैब रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और आरोपी डॉक्टरों के संपर्कों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय के कुछ और कर्मचारियों और छात्रों से पूछताछ की जा सकती है। यह मामला देशभर में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्थाओं पर भी नया सवाल खड़ा कर गया है।
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