Delhi: केंद्र सरकार राजधानी दिल्ली की सात पुरानी सरकारी आवासीय कॉलोनियों के बड़े पैमाने पर पुनर्विकास की योजना पर काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को एक खास सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल के तहत लागू किया जा रहा है, जिसमें करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पुराने और जर्जर सरकारी आवासों की जगह आधुनिक सुविधाओं से लैस नए आवास उपलब्ध कराना है। इस परियोजना के तहत सरोजिनी नगर, नेताजी नगर, नौरोजी नगर, कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदपुर कॉलोनियों का पुनर्विकास किया जाएगा। करीब 537 एकड़ क्षेत्र में फैली इन कॉलोनियों के कई मकान काफी पुराने हो चुके थे और लगभग 40 प्रतिशत घरों को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया था। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए 20 हजार से अधिक घरों की कमी भी महसूस की जा रही थी।
पुराने मकानों की जगह बनेंगे आधुनिक फ्लैट
पुनर्विकास योजना के तहत लो-राइज इमारतों को हटाकर उनकी जगह आधुनिक हाई-राइज आवासीय कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे। इस परियोजना के पूरा होने के बाद 21 हजार से अधिक नए फ्लैट उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही बेहतर सड़कें, सार्वजनिक सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जाएगा।
Delhi: प्रधानमंत्री करेंगे फ्लैटों का उद्घाटन
इस परियोजना के तहत 8 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2,722 नए बने फ्लैटों का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन पुनर्विकास योजना के तहत 6,632 नए फ्लैटों की आधारशिला भी रखी जाएगी। ये फ्लैट सरोजिनी नगर, नेताजी नगर, कस्तूरबा नगर और श्रीनिवासपुरी में बनाए जाएंगे।
सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल से होगा पूरा खर्च
सरकार इस परियोजना को सेल्फ-सस्टेनिंग वित्तीय मॉडल के तहत पूरा कर रही है। कुल क्षेत्रफल का केवल 69.41 एकड़, यानी लगभग 12.9 प्रतिशत हिस्सा व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए विकसित कर उसका मॉनेटाइजेशन किया जाएगा। इससे लगभग 35,100 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है, जबकि परियोजना की लागत करीब 32,800 करोड़ रुपए बताई गई है। सरकार के अनुसार यह मॉडल शहरी पुनर्विकास के क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश करेगा और बिना सरकारी बजट पर बोझ डाले बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे किए जा सकेंगे।






