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रूस से तेल ले सकता है भारत: अमेरिका

Donald trump: अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत आने वाले तीस दिन तक रूस से तेल खरीद सकता है। भारत का रूस के साथ तेल का व्यापार रूबल में हो रहा है। लेकिन पिछले दिनों अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगाया था कि वह रूस से तेल का आयात नहीं कर सकता है। यदि तेल की खरीददारी करेगा, तो उसकी भारत को बड़ी कीमत चुकानी होगी। यानी अमेरिका का आशय था कि यदि भारत रूस से तेल खरीदेगा, तो उसे दो सौ प्रतिशत टैरिफ अमेरिका को चुकाना पड़ेगा। ट्रंप ने तो यहां तक कहा था कि टैरिफ भारत पर और भी ज्यादा लगाया जा सकता है। हालांकि अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस तरह से विदेशी व्यापार में अपनी मनमानी करने से रोका था। कोर्ट ने इस कार्य को असंवैधानिक करार दिया था।

रूस-यूक्रेन युद्ध और नाटो की भूमिका

रूस का यूक्रेन के साथ युद्ध करने के कारण यह प्रतिबंध रूस पर लगाया गया था, ताकि रूस की अर्थव्यवस्था तंगी में आकर युद्ध जारी रखने की स्थिति में न रहे। अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाया जाए। सदस्यता को रोकने के लिए रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला किया। वह नहीं चाहता कि नाटो की सदस्यता लेकर यूक्रेन उसके पड़ोस में विरोधी की भूमिका निभाए।

Donald trump: सोवियत संघ के विघटन के बाद की स्थिति

यूक्रेन पहले यूएसएसआर (USSR) के समय रूस का हिस्सा था, लेकिन बाद में सोवियत संघ के टूटने के साथ यह अलग हो गया। अमेरिका नहीं चाहता था कि रूस पहले की तरह शक्तिशाली बना रहे। इसलिए सोवियत संघ कई हिस्सों में बंट गया, जिनमें यूक्रेन भी शामिल था। अमेरिका की कोशिश रही है कि यूक्रेन पूरी तरह रूस से दूर रहे और नाटो के साथ खड़ा रहे। रूस के सामने एक तरह की दीवार बनाकर अमेरिका यूक्रेन को खड़ा किए हुए है। यही वजह है कि रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिशें भी की जाती रही हैं, ताकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने नाटो गठबंधन को मजबूत रखा जा सके।

Donald trump: तीसरे विश्व युद्ध जैसी बनती वैश्विक स्थिति

आज दुनिया में जो माहौल बन रहा है, उसे कई लोग तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ता माहौल मान रहे हैं। विकसित देशों की कोशिश खुद को और ज्यादा मजबूत करने की है, जबकि विकासशील देशों को अक्सर अलग नजर से देखा जाता है। इसी कारण वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में विकसित, अविकसित और विकासशील देशों के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।

ईरान युद्ध पर अमेरिका का भारी खर्च

Donald trump: अमेरिका ने खुद को ईरान के साथ संघर्ष में झोंक दिया है और अब इसकी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। पेंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका को इस युद्ध में हर दिन करीब एक अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। इसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और अगर युद्ध लंबा चला तो आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

By: भगवती प्रसाद डोभाल

 

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