Donald trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि ईरान को बिना शर्त सरेंडर करना होगा, इसके अलावा कोई समझौता नहीं होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा कि ईरान के साथ केवल एक ही विकल्प है, बिना शर्त आत्मसमर्पण। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका एक ऐसे स्वीकार्य नेता के चयन में मदद करेगा जो ईरान को बर्बादी के कगार से वापस लाकर एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा सके।
स्थायी शांति की बात कर रहा ईरान
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान ने क्षेत्र में शांति की इच्छा जताई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि कुछ देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन देश के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करने में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ईरानी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को बिना शर्त सरेंडर करना होगा।
Donald trump: ईरान को फिर मजबूत बनाने की बात
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को बर्बादी के कगार से वापस लाने के लिए लगातार काम करेगा। उनका दावा है कि अगर हालात बदलते हैं तो ईरान को आर्थिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत और समृद्ध बनाया जा सकता है। उन्होंने ईरान के उज्ज्वल भविष्य की बात करते हुए देश को फिर से महान बनाने की अपील भी की।
Donald trump: क्या लंबा चलेगा यह संघर्ष?
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद यह संघर्ष लंबा खिंचता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि इस युद्ध का असर पश्चिम एशिया समेत करीब 14 देशों तक पहुंच चुका है। 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए।
कई देशों तक पहुंचा युद्ध का असर
Donald trump: हाल ही में हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया, जिसमें करीब 80 नौसैनिकों की मौत हुई। इसके अलावा ईरान ने अजरबैजान पर भी मिसाइल हमला किया है। वहीं इजरायल लेबनान के दक्षिणी हिस्से में हिजबुल्ला के ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इस संघर्ष का असर तेल और गैस की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। युद्ध में अब तक ईरान में करीब 1,230 लोगों, लेबनान में 120 से ज्यादा, और इजरायल में लगभग एक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हमलों में छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।
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