Donald Trump: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी हिंसक तनाव के बीच अमेरिका ने इस मामले में सीधे दखल देने से दूरी बना ली है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि वह इस विवाद में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की।
पाक नेतृत्व पर ट्रंप की तारीफ
मीडिया से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की सराहना करते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास सक्षम और मजबूत नेतृत्व है। ट्रंप ने कहा कि वह इन दोनों नेताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें विश्वास है कि पाकिस्तान अपने हालात को संभाल सकता है। इसी कारण उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं समझी।
Donald Trump: तनाव के बीच आया बयान
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हिंसा तेज हुई है और कई लोगों की जान जा चुकी है। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हालात बिगड़ने पर अफगानिस्तान के साथ खुली जंग की बात कही थी, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।
अमेरिका का आधिकारिक रुख
अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता एलिसन एम. हूकर ने कहा कि वॉशिंगटन तालिबान हमलों के खिलाफ पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि तालिबान आतंकवाद के खिलाफ किए गए अपने वादों पर खरा नहीं उतरा है, जिसके चलते अफगानिस्तान का इस्तेमाल आतंकी संगठन हमलों के लिए कर रहे हैं। इससे पूरा इलाका अस्थिर हो रहा है।
Donald Trump: अफगानिस्तान में अमेरिका की पुरानी भूमिका
अमेरिका लगभग 20 वर्षों तक अफगानिस्तान में सैन्य रूप से मौजूद रहा। यह दखल 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिनकी साजिश अलकायदा ने रची थी। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने तालिबान शासन से ओसामा बिन लादेन को सौंपने की मांग की थी। मांग ठुकराए जाने के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया।
2021 में बदला परिदृश्य
अमेरिकी हमलों के बाद तालिबान शासन गिरा, लेकिन 2021 में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही तालिबान ने फिर से अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका अब इस क्षेत्र में सीधे सैन्य या राजनीतिक हस्तक्षेप से बचता नजर आ रहा है। पाकिस्तान–अफगानिस्तान तनाव पर ट्रंप का रुख यह संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल क्षेत्रीय विवादों में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने के बजाय स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा कर रहा है। हालांकि आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर उसकी चिंता अब भी बरकरार है।
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