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बड़ा राजनीतिक फैसला: पूर्वी नागालैंड विवाद खत्म, पीएम मोदी का ऐतिहासिक बयान

Eastern Nagaland Accord: पूर्वी नागालैंड से जुड़े दशकों पुराने लंबित मुद्दे के समाधान की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारत सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताते हुए कहा है कि यह समझौता क्षेत्र के लोगों के लिए विकास, अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि यह समझौता विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास को नई दिशा देगा और यह पूर्वोत्तर में शांति, प्रगति और समावेशी विकास के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गृह मंत्री अमित शाह ने बताया ऐतिहासिक कदम

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते की जानकारी देते हुए कहा कि इस पहल से पूर्वी नागालैंड से जुड़े सभी लंबे समय से लंबित और विवादित मुद्दों का समाधान हुआ है। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के लिए प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

Eastern Nagaland Accord: पूर्वी नागालैंड के छह जिलों के लिए नई अथॉरिटी

गृह मंत्री अमित शाह और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की मौजूदगी में हुए इस समझौते के तहत पूर्वी नागालैंड के छह जिलों तुएनसांग, मोन, किफिरे, लॉन्गलेंग, नोकलाक और शमाटोर के लिए फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) का गठन किया जाएगा। एफएनटीए को 46 विषयों से संबंधित प्रशासनिक और विकासात्मक शक्तियां सौंपी जाएंगी।

मिनी सचिवालय और विकास खर्च का नया ढांचा

समझौते के तहत एफएनटीए के लिए एक मिनी सचिवालय का भी प्रावधान किया गया है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी करेगा। इसके अलावा पूर्वी नागालैंड क्षेत्र के लिए विकास व्यय का बंटवारा आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में किया जाएगा।

Eastern Nagaland Accord: संविधान के अनुच्छेद 371(ए) पर कोई असर नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता भारत के संविधान के अनुच्छेद 371(ए) के प्रावधानों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करता है, जिससे नागालैंड की विशेष संवैधानिक स्थिति पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

संवाद से समाधान की प्रतिबद्धता

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता इस बात का प्रमाण है कि भारत सरकार पूर्वोत्तर के लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं को समझते हुए संवाद और आपसी सम्मान के जरिए समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। यह लोकतंत्र के उस मूल सिद्धांत को भी मजबूत करता है कि स्थायी समाधान हिंसा नहीं, बल्कि बातचीत से ही संभव हैं।

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