Galgotias University: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट’ में एक यूनिवर्सिटी की तरफ से चीनी रोबोट डॉग प्रदर्शित किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे ‘एआई समिट’ एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा बताया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया ‘भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय ‘एआई शिखर सम्मेलन’ एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा है। भारतीय डेटा बेचा जा रहा है और चीनी उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।’
इससे पहले, कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि एआई को लेकर सरकार ने देश की छवि को पूरी दुनिया में हास्यास्पद बना दिया है। अभी चल रहे एआई समिट में चीनी रोबोट को हमारे अपने रोबोट के तौर पर दिखाया जा रहा है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह सच में भारत के लिए शर्मनाक है। पार्टी ने आगे लिखा कि इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि सरकार के मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसी झूठ में शामिल हैं, भारतीय समिट में चीन के रोबोट को प्रमोट कर रहे हैं। सरकार ने देश की छवि को ऐसा नुकसान पहुंचाया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। उन्होंने एआई, एक ऐसा फील्ड, जिसमें हम अपनी डेटा पावर के दम पर दुनिया के लीडर बन सकते थे, को एक मजाक बना दिया है।
Instead of leveraging India’s talent and data, the AI summit is a disorganised PR spectacle – Indian data up for sale, Chinese products showcased. https://t.co/5liaoX0XXp
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 18, 2026
जबकि आम आदमी पार्टी (आप) ने भी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भाजपा सरकार शुरुआत से ही कॉपी-पेस्ट योजना चलाकर काम कर रही है। अब सरकार एआई समिट कर रही है, जो सरकार के मंत्री अश्विनी वैष्णव की देखरेख में हो रहा है। इस दौरान एक निजी यूनिवर्सिटी चीन से रोबोट डॉग लेकर एआई समिट में शामिल होती है और उसे अपनी रिसर्च बता देती है। इस फ्रॉड से पूरी दुनिया में भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का मजाक बनाया जा रहा है।
सरकार की सख्ती
हालांकि, सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि विवाद को गंभीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी को एआई समिट के एक्सपो क्षेत्र से हटने का निर्देश दिया गया है। समिट में नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं, ऐसे में पारदर्शिता और प्रस्तुति को लेकर सख्त मानक अपनाए जा रहे हैं। फिलहाल, यह मामला टेक्नोलॉजी प्रदर्शन में पारदर्शिता और ‘मेक इन इंडिया’ दावों की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
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