Ganga Sagar Mela: मकर संक्रांति से पहले पश्चिम बंगाल के गंगासागर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्नान कर सूर्य देव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। आस्था और श्रद्धा से भरे इस महापर्व को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है।
कुंभ के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक मेला
गंगासागर मेला हिंदू धर्म के सबसे पवित्र आयोजनों में से एक माना जाता है। यह मेला हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर कपिल मुनि के आश्रम में आयोजित होता है और कुंभ मेले के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
Ganga Sagar Mela: भक्ति, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण
मेले में पहुंचे श्रद्धालु भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार में लीन नजर आ रहे हैं। पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। श्रद्धालु कूर्मा चैतन्य दास ने कहा कि इस युग में भगवान के पवित्र नामों का जाप आत्मशुद्धि का माध्यम है। उन्होंने कहा कि जैसे सूर्य की किरणें गंदगी को साफ करती हैं, वैसे ही भगवान कृष्ण के नाम का स्मरण चेतना को शुद्ध करता है।
प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा और स्वास्थ्य इंतजाम
दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। मेले में पुलिस बल, मेडिकल टीमें, आपदा प्रबंधन दल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी निगरानी, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखा गया है।
Ganga Sagar Mela: कपिल मुनि आश्रम में पूजा और गंगा आरती
श्रद्धालु कपिल मुनि मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं। एक अन्य भक्त आचार्य मनोज पांडे ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां की भव्य गंगा आरती इस आयोजन को और भी दिव्य बनाती है। उन्होंने बताया कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जा रहा है।
मोक्ष की कामना के साथ पहुंचे लाखों श्रद्धालु
ठंडी सुबह में भी श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ पवित्र स्नान कर रहे हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में डुबकी लगाने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। इसी विश्वास के साथ दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
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