Gas crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के उर्वरक सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई बाधित होने के बाद देश के कई यूरिया प्लांट अपनी क्षमता से काफी कम उत्पादन कर रहे हैं। देश की सबसे बड़ी एलएनजी टर्मिनल ऑपरेटर Petronet LNG Limited ने ‘अपरिहार्य स्थिति’ (Force Majeure) घोषित कर दी है। इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई रुकावट बताई जा रही है, जहां से गैस लाने में सप्लायर्स ने असमर्थता जताई है।
गैस सप्लाई में भारी कटौती
सरकारी गैस कंपनियां जैसे GAIL (India) Limited, Indian Oil Corporation और Bharat Petroleum Corporation Limited ने अब उर्वरक कंपनियों को मिलने वाली गैस में कटौती शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, गैस सप्लाई को घटाकर 60-65% तक कर दिया गया है, जबकि कुछ प्लांट्स को 50% से भी कम गैस मिल रही है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है, जहां कई जगहों पर यूरिया उत्पादन लगभग आधा रह गया है।
Gas crisis: कम उत्पादन, ज्यादा खर्च
प्लांट अधिकारियों के अनुसार, कम लोड पर प्लांट चलाने से उत्पादन घटने के साथ-साथ ऊर्जा की खपत करीब 40% तक बढ़ गई है। बड़ी अमोनिया-यूरिया यूनिट्स इस तरह के उतार-चढ़ाव के लिए डिजाइन नहीं होतीं, जिससे उनकी दक्षता घट जाती है और लागत बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
Gas crisis: मनमर्जी से नहीं बदल सकते उत्पादन
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े प्लांट अचानक उत्पादन बढ़ाने या घटाने में सक्षम नहीं होते। गैस सप्लाई में अचानक बदलाव से पूरे ऑपरेशन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
स्टॉक फिलहाल राहत दे रहा, लेकिन खतरा बरकरार
Gas crisis: हालांकि राहत की बात यह है कि 19 मार्च तक भारत के पास 61.14 लाख टन यूरिया का स्टॉक मौजूद है, जो पिछले साल से ज्यादा है। लेकिन अगर गैस सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले खरीफ सीजन से पहले उर्वरक की कमी की आशंका बढ़ सकती है।
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