Gaza news: गाजा में जारी संघर्ष को खत्म करने और शांति स्थापित करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत भारत को भी गाजा के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। न्यूज़ एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को इस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। भारत के इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों देशों के साथ ऐतिहासिक और संतुलित संबंध रहे हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से ही भारत मिस्र के रास्ते गाजा को लगातार मानवीय सहायता भी पहुंचा रहा है।
शांतिपूर्ण समाधान पर भारत का ज़ोर
भारत पहले से ही गाजा संकट के शांतिपूर्ण समाधान की अपील करता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंधकों की रिहाई को लेकर इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच हुए समझौते का स्वागत किया था। पीएम मोदी ने दो टूक कहा था कि आतंकवाद किसी भी रूप में और दुनिया में कहीं भी स्वीकार्य नहीं है। पिछले साल अक्टूबर में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत के बाद पीएम मोदी ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा था कि भारत बंधकों की रिहाई और गाजा के लोगों के लिए मानवीय सहायता बढ़ाने के समझौते का स्वागत करता है।
Gaza news: पाकिस्तान को भी मिला निमंत्रण
इस बीच पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि उसे गाजा के लिए बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता मिला है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से औपचारिक निमंत्रण मिला है। अंद्राबी के मुताबिक, पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल रहेगा और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुसार फलस्तीन मुद्दे के स्थायी समाधान का समर्थन करेगा।
क्या है गाजा का ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
Gaza news: गाजा का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना का अहम हिस्सा है, जिसका गठन 15 जनवरी को किया गया था। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस बोर्ड के अध्यक्ष खुद ट्रंप होंगे। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में नए गवर्नेंस सिस्टम की स्थापना करना और इलाके में स्थिरता लाना है। बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, और सीनियर वार्ताकार जेरेड कुशनर व स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। ट्रंप ने इसे अब तक का सबसे प्रभावशाली बोर्ड बताते हुए कहा है कि यह एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और ट्रांजिशनल गवर्निंग एडमिनिस्ट्रेशन के तौर पर काम करेगा। इस योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की भी मंज़ूरी मिल चुकी है।
यह भी पढ़ें: माघ मेले की मौनी अमावस्या पर 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने लिया पवित्र स्नान







