Geetanjali IISc: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘गीतांजलि IISc’ ग्रुप की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह ग्रुप अब सिर्फ एक क्लास नहीं, बल्कि पूरे कैंपस का सांस्कृतिक केंद्र बन गया है। यहाँ छात्र हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, लोक परंपराएं और अन्य शास्त्रीय विधाओं का अभ्यास (रियाज) एक साथ करते हैं।
संगीत और परंपरा – छात्रों ने बनाई अपनी पहचान
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि आज का जीवन टेक्नोलॉजी से संचालित हो रहा है। जो बदलाव सदियों में होते थे, अब हम उन्हें कुछ वर्षों में देख रहे हैं। कई लोग चिंतित हैं कि रोबोट्स मनुष्यों की जगह ले सकते हैं। ऐसे समय में मानव विकास के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें खुशी है कि नई सोच और नए तरीकों के साथ अगली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ों को मजबूती से थाम रही है। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की पहचान रिसर्च और इनोवेशन है। कुछ साल पहले वहां के छात्रों ने महसूस किया कि पढ़ाई और रिसर्च के बीच संगीत के लिए भी जगह होनी चाहिए। इसी जरूरत से एक छोटी-सी म्यूजिक क्लास की शुरुआत हुई।
Geetanjali IISc: प्रोफेसर और परिवार भी जुड़े
पीएम मोदी ने कहा कि ना बड़ा मंच और ना कोई बड़ा बजट, बस धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज इसे हम ‘गीतांजलि आईआईएससी’ के नाम से जानते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र यहां साथ बैठकर रियाज करते हैं। प्रोफेसर साथ बैठते हैं और उनके परिवार भी जुड़ते हैं। पीएम मोदी ने बताया कि आज दो-सौ से ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं। खास बात ये कि जो विदेश चले गए, वो भी ऑनलाइन जुड़कर इस ग्रुप की डोर थामे हुए हैं।
डिजिटल जुड़ाव – विदेश में रहने वाले छात्र भी जुड़े
इसी दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं से ‘हैकेथन्स’ में भाग लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि पिछले 7-8 वर्षों में ‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन’ में 13 लाख से अधिक छात्र और 6 हजार से अधिक संस्थान शामिल हो चुके हैं। युवाओं ने इस कार्यक्रम में सैंकड़ों समस्याओं के प्रभावी और सटीक समाधान भी दिए हैं। ऐसे ‘हैकेथन्स’ समय-समय पर आयोजित होते रहता है।
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