Ghaziabad News: दिल्ली से सटे गाजियाबाद के मोहल्लों में बंदरों ने जो गदर मचा रखा है, उसे लेकर अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सालों से नगर निगम और वन विभाग जिस जिम्मेदारी को एक-दूसरे पर टाल रहे थे, उसे अब शासन ने सुलझा दिया है। अब सीधा आदेश आया है कि शहर के बंदरों को पकड़ने और उन्हें ठिकाने लगाने की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। नगर निगम अब सिर्फ उनकी मदद करेगा।
सालों से चल रहा था ‘तू-तू मैं-मैं’ का खेल
ये मामला 2020 से लटका हुआ था। नगर निगम ने तब वन विभाग से 2000 बंदरों को पकड़ने की परमिशन मांगी थी, लेकिन वन विभाग ने फाइल दबा दी। निगम ने तीन बार टेंडर निकाले, पर कोई पकड़ने वाला नहीं मिला क्योंकि वन विभाग की दी हुई डेडलाइन ही निकल गई थी। इसके बाद जब भी कोई बंदरों की शिकायत करता, तो निगम कहता- ‘ये वन विभाग का काम है’ और वन विभाग कहता- ‘शहर में हम क्यों पकड़ें?’ इस चक्कर में जनता पिस रही थी।
Ghaziabad News: मोदीनगर के बवाल ने दिखाया असर
अभी 31 अक्टूबर को मोदीनगर के सीकरी खुर्द में जो हुआ, उसने सरकार की आंखें खोल दीं। एकता दिवस पर जब ‘रन फॉर यूनिटी’ शुरू हुई, तो बंदरों से परेशान ग्रामीणों ने लाठी-डंडे लेकर उसे रोक दिया। महिलाओं और बुजुर्गों ने नेताओं को खूब खरी-खोटी सुनाई। रेलवे स्टेशन पर भी बंदरों का ऐसा कब्जा है कि रेलवे वाले कई बार वन विभाग को चिट्ठी लिखकर हाथ-पैर जोड़ चुके थे।
50 हजार बंदरों का खौफ
पूरे जिले में करीब 50 हजार बंदर हैं। राजनगर, संजय नगर, गोविंदपुरम, कविनगर, शास्त्रीनगर और राजनगर एक्सटेंशन जैसे इलाकों में तो बंदरों ने जीना मुहाल कर रखा है। आए दिन किसी न किसी को काटने की खबर आती है। सरकार ने साफ कह दिया है कि अब बंदरों को पकड़ने, उन्हें सुरक्षित जगह ले जाने और उनके मैनेजमेंट का पूरा काम वन विभाग (पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग) ही देखेगा। वन विभाग को एक महीने के अंदर अपना पूरा प्लान तैयार करने को कहा गया है। डॉक्टर अनुज (उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी) ने भी साफ कर दिया है कि अब निगम सीधे तौर पर बंदर नहीं पकड़ेगा।
Report BY: विभु मिश्रा
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