Ghaziabad News: अल फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आए टेरर मॉड्यूल को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि स्मार्ट सिटी फरीदाबाद से आतंकवाद का एक और चौंकाने वाला कनेक्शन सामने आया है। इस बार गाजियाबाद से उजागर हुए देशव्यापी जासूसी और रेकी गिरोह की कड़ियां फरीदाबाद से जुड़ी मिली हैं। गाजियाबाद पुलिस ने इस नेटवर्क के एक अहम सदस्य नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है, जो फरीदाबाद के गांव नचौली स्थित एक पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने की दुकान चला रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह पिछले तीन महीनों से यहीं रहकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
पाकिस्तान तक पहुंचता था डेटा
जांच में सामने आया है कि नौशाद रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की फोटो और वीडियो बनाकर व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले उसे प्रति फोटो 4 से 6 हजार रुपये मिलते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने दिल्ली-हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों के आसपास सोलर कैमरे लगाने की साजिश रची थी। कुछ स्थानों पर कैमरे लगाए भी जा चुके थे, जिनका एक्सेस सीधे पाकिस्तान में मौजूद लोगों के पास था। यानी संवेदनशील जगहों की लाइव निगरानी विदेश से की जा रही थी।

Ghaziabad News: 450 से ज्यादा फोटो-वीडियो भेजे गए
पूछताछ करने पर पता चला कि गिरोह अब तक 450 से अधिक फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेज चुका है। इसके अलावा लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग भी की जा रही थी। हर कैमरे की इंस्टॉलेशन पर आरोपियों को 10 से 15 हजार रुपये मिलते थे। दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास लगाए गए कैमरे पुलिस ने बरामद कर लिए हैं और उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। वहीं मामले में डीसीपी सिटी धवल जायसवाल का कहना है कि इस मामले में अब तक मेरठ निवासी सरगना सुहेल समेत 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। औरंगाबाद की मीरा को भी पकड़ा गया है, जबकि एक आरोपी नाबालिग है। जांच एजेंसियां गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
कैसे खुला नौशाद का राज?
दरअसल, 16 मार्च को गाजियाबाद पुलिस सादे कपड़ों में पेट्रोल पंप पर पहुंची। कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान नौशाद की पहचान हुई और उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। उसका मोबाइल भी जब्त किया गया है। जांच में सामने आया है कि नौशाद को यहां बसाने की पूरी साजिश रची गई थी। पेट्रोल पंप के पूर्व मैनेजर के जरिए संपर्क कर उसे कोलकाता से बुलाया गया और दुकान खुलवाई गई, ताकि वह बिना शक के अपनी गतिविधियां चला सके। वहीं पेट्रोल पंप पर काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि नौशाद बेहद साधारण और मिलनसार व्यवहार करता था। वह वहीं रहता था और सभी के साथ घुल-मिल गया था। किसी को भी उस पर शक नहीं हुआ। फिलहाल, यूपी पुलिस, एटीएस, दिल्ली और हरियाणा पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का मकसद, फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को लेकर अभी और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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