Gig Workers: क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, ज़ोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों ने अपने ऐप, विज्ञापनों और ब्रांडिंग से ‘10 मिनट डिलीवरी’ का दावा हटा दिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य गिग वर्कर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
सरकार के हस्तक्षेप के बाद बदला फैसला
सरकार की ओर से लगातार उठाई जा रही सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी का वादा हटाने का निर्णय लिया। माना जा रहा है कि इस कदम से डिलीवरी पार्टनर्स पर समय का दबाव कम होगा और वे सुरक्षित तरीके से काम कर सकेंगे।
Gig Workers: गिग वर्कर्स को मिली बड़ी राहत
आईएएनएस से बातचीत में कई गिग वर्कर्स ने इस फैसले का स्वागत किया। राहुल नामक डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि 10 मिनट की डिलीवरी का दबाव हमेशा चिंता का कारण रहता था। ट्रैफिक में फंसने पर समय पर ऑर्डर पहुंचाना मुश्किल हो जाता था, जिससे डर बना रहता था कि कहीं नुकसान न उठाना पड़े।
हादसों का खतरा होगा कम
सनी, जो पिछले 9 महीनों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, ने कहा कि 10 मिनट का टारगेट पूरा करने के लिए तेज बाइक चलानी पड़ती थी, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता था। अब इस नियम के हटने से मानसिक दबाव कम होगा और काम सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा।
Gig Workers: बेहतर भुगतान की भी मांग
गिग वर्कर्स का कहना है कि समय का दबाव हटने से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन वे बेहतर भुगतान की भी उम्मीद करते हैं। उनका मानना है कि 10 मिनट की जगह 20 मिनट का समय दिया जाना अधिक व्यावहारिक है और इससे काम की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी।







