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एमसीएक्स पर सोना 953 रुपए फिसला, चांदी में 3,945 रुपए की कमजोरी दर्ज, जानें वजह

गुरुवार को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। सोना लगभग 1.52 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.45 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे चली गई। अमेरिकी फेड के ब्याज दर स्थिर रखने और मुद्रास्फीति बढ़ने के कारण बाजार दबाव में है।
सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट

Gold Silver Prices: गुरुवार के कारोबारी सत्र में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इसके चलते सोने की कीमत लगभग 1.52 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई, जबकि चांदी की कीमत 2.45 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे गिर गई।

सोना और चांदी में कमजोरी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10:21 बजे सोने का 2 अप्रैल, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.62 प्रतिशत या 953 रुपए गिरकर 1,52,072 रुपए पर था। कारोबार के दौरान सोने का न्यूनतम स्तर 1,51,712 रुपए और उच्चतम स्तर 1,53,025 रुपए दर्ज किया गया।

चांदी की कीमतों में भी कमजोरी बनी हुई है। 5 मई, 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट 3,945 रुपए या 1.59 प्रतिशत गिरकर 2,44,249 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी का न्यूनतम स्तर 2,43,083 रुपए और उच्चतम स्तर 2,45,387 रुपए रहा।

Gold Silver Prices: सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट
सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट

Gold Silver Prices: फेड फैसले से बाजार प्रभावित

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक, सोना 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,850 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75.735 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

सोने की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व (फेड) का हालिया फैसला माना जा रहा है। बुधवार को फेड ने ब्याज दरों को लगातार दूसरी बार यथावत रखा। वर्तमान में अमेरिका में ब्याज दरें 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच हैं।इससे पहले फेड ने सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर 2025 में ब्याज दरों में कटौती की थी।

सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट
सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट

मुद्रास्फीति और भू-राजनीति का असर

वीटी मार्केट्स के वरिष्ठ विश्लेषक एपीएसी जस्टिन खू ने कहा कि फेड द्वारा ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय उस समिति की चुनौतियों को दर्शाता है जो भू-राजनीतिक तनाव और लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति से जूझ रही है।

उन्होंने आगे कहा कि फेड चेयरमैन पॉवेल ने बताया कि कई अधिकारियों ने अपने पूर्वानुमानों में बदलाव कर दो कटौती की बजाय केवल एक कटौती करने का निर्णय लिया है। यह परिवर्तन मुद्रास्फीति में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि के बाद किया गया, जो मुख्य रूप से तीन हफ्तों से चल रहे ईरान युद्ध और वैश्विक तेल बाजार पर इसके प्रभाव के कारण है।

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