Governor Acharya Devvrat: गुजरात और महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत आज देश में ऐसे कुछ चुनिंदा जनप्रतिनिधियों में गिने जाते हैं, जो अपने पद की मर्यादा के साथ-साथ धरातल पर सक्रियता के लिए भी विशेष पहचान रखते हैं। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने अपने कार्यशैली से साबित किया है कि नेतृत्व केवल कार्यालयों में बैठकर नहीं, बल्कि लोगों के बीच जाकर व्यवहारिक रूप से काम करने से मजबूत होता है। पिछले तीन महीनों में महामहिम राज्यपाल गुजरात के 11 से अधिक गाँवों में रुक चुके हैं। उनका यह सफर औपचारिक पर्यटन नहीं, बल्कि वास्तविक ग्रामीण जीवन को समझने और लोगों को प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और स्वच्छता की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास है।
गाँव में घुल मिलकर दी नसीहत
गाँवों में ठहरते समय राज्यपाल किसी विशेष औपचारिकता की अपेक्षा नहीं रखते। सुबह सबसे पहले वे स्थानीय लोगों से बातचीत करते हैं, बच्चों के साथ स्कूल में समय बिताते हैं और किसानों के खेतों में उनके साथ हाथ से काम भी करते हैं। कई मौकों पर उन्हें गाँव की गलियों में स्वयं झाड़ू लगाते, गाय का दूध दुहते, पशुपालकों के साथ गोशाला की देखरेख करते, और किसानों के खेतों में हल चलाते हुए देखा गया है। यह दृश्य केवल प्रेरणादायक नहीं बल्कि एक बड़ी सीख है। उनकी यही नसीहत अब सबके लिए प्रेरणा का श्रोत बन रही है।

प्राकृतिक खेती के प्रचारक के रूप में अग्रणी भूमिका
Governor Acharya Devvrat: महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत वर्षों से देशभर में प्राकृतिक खेती का बड़ा अभियान पूरे देख में चला रहे हैं। उनका मानना है कि रासायनिक खेती किसानों की जमीन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था तीनों प्रभावित करता है। इसलिए वे जहाँ भी जाते हैं, किसानों को प्राकृतिक खेती की पद्धति सिखाते हैं, देशी बीजों का उपयोग बढ़ाने की सलाह देते हैं और जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया भी बताते हैं। अब तक वे देश के 500 से अधिक गाँवों का दौरा कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने खेती, पर्यावरण और सामाजिक सुधार से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की है। गुजरात और महाराष्ट्र में भी वे लगातार ग्रामीण समुदायों को प्रकृति-आधारित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

युवा पीढ़ी और स्कूलों पर विशेष ध्यान
गाँवों में रुकने के दौरान राज्यपाल स्कूलों में जाकर छात्रों से वार्ता करते हैं और उन्हें अनुशासन, स्वच्छता और पर्यावरण के महत्व के बारे में समझाते हैं। कई स्कूलों में उन्होंने पौधारोपण कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। वे बच्चों को बताते हैं कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी से शुरू होता है।
समाज के लिए एक प्रेरक संदेश
Governor Acharya Devvrat: गुजरात और महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत का यह अभियान केवल यात्रा भर नहीं है, बल्कि एक विचारधारा है जिसका केंद्र सेवा, सादगी और समाज के साथ सीधा जुड़ाव है। गाँवों में रहकर उन्होंने यह साबित किया है कि विकास की असली धारा तभी मजबूत होगी जब नेता स्वयं जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझेंगे और समाधान को व्यवहारिक रूप देंगे। उनकी ये पहल न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है। प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, स्वच्छता और ग्रामीण उत्थान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाले समय में ग्रामीण भारत के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।
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