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अब माता-पिता की देखभाल होगी जरूरी! बढ़ते सामाजिक संकट पर हैदराबाद पुलिस आयुक्त का बड़ा कदम

पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार

बुजुर्ग नागरिकों की सुरक्षा के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तेलंगाना सरकार ने ‘माता-पिता सहायता विधेयक’ को मंजूरी दे दी है। इसके तहत बच्चों के लिए अपने माता-पिता की देखभाल करना अनिवार्य हो गया है। इस विधेयक पर हैदराबाद शहर पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने एक्स पोस्ट पर एक वीडियो जारी करते हुए लिखा है कि जो समाज अपने माता-पिता को भूल जाता है, वह अपनी आत्मा खोना शुरू कर देता है।

वी.सी. सज्जनार ने एक्स पोस्ट में कहा कि जिन हाथों ने कभी हमें गिरने पर सहारा दिया था, वही हाथ अब हमसे दूर धकेले जा रहे हैं। जिन माता-पिता ने हमारे लिए भूख हड़ताल की, जिन्होंने अपना पूरा जीवन हमारे सपनों के इर्द-गिर्द बुन दिया, आज उन्हें न सिर्फ घरों में, बल्कि दिलों में भी छोड़ दिया गया है। यह एक खामोश और दर्दनाक विश्वासघात है जो सबके सामने घटित हो रहा है। ऐसे समय में जब करुणा क्षीण हो रही है और रिश्ते लेन-देन में तब्दील हो रहे हैं, तेलंगाना सरकार का बच्चों को उनके कर्तव्य की याद दिलाने का निर्णय केवल नीतिगत नहीं, बल्कि एक नैतिक हस्तक्षेप है। माता-पिता सहायता विधेयक की स्वीकृति मात्र प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि बढ़ते सामाजिक संकट का जवाब है। जो बच्चे माता-पिता की देखभाल नहीं करते तो कानून के जरिए उसे कराने की अपेक्षा की जा रही है। यह कानून केवल एक राज्य की नीति नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व के लिए एक सशक्त उदाहरण है।

यह दर्शाता है कि सच्ची प्रगति केवल आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि इस बात में निहित है कि कोई समाज उन लोगों की देखभाल कैसे करता है जिन्होंने कभी उसकी देखभाल की थी। वी.सी. सज्जनार ने कहा कि अपने बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा करने वालों की आय का एक हिस्सा सीधे उन्हें देना महज एक नियम नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह उन लोगों के लिए एक चेतावनी है, जिन्होंने विवेक की जगह सुविधा को चुना है। यह उन माता-पिता के लिए एक सुरक्षा कवच है, जिनकी गरिमा को कभी सुरक्षा की आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए थी। क्योंकि सच्चाई सरल और कड़वी है। माता-पिता अपने अंतिम वर्षों में धन, आराम या विलासिता की लालसा नहीं रखते। वे उपस्थिति, बातचीत और इस बात का एहसास चाहते हैं कि वे अब भी महत्वपूर्ण हैं। जब उन्हें यह भी नहीं मिलता, तो यह केवल उपेक्षा नहीं, बल्कि मानवता का ही परित्याग है।

पुलिस आयुक्त ने कहा यह निर्णय न केवल किसी राज्य या राष्ट्र को, बल्कि हम सभी को यह याद दिलाता है कि मूल्यों के बिना प्रगति खोखली होती है। मैं तेलंगाना सरकार को इस साहसिक और मानवीय कदम के लिए, उन लोगों के लिए खड़े होने के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूं जो कभी निसंदेह हमारे लिए खड़े रहे। अपने माता-पिता का सम्मान करें। इसलिए नहीं कि कानून इसकी मांग करता है, बल्कि इसलिए कि उनके बिना आप यह भी नहीं जान पाएंगे कि खड़े होने का क्या अर्थ होता है।

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