India Defence Deal: रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं को आस्वस्थ किया कि आपको युद्ध करने के लिए आधुनिक हथियारों की कमी नहीं होगी। इस प्रसंग में 1962 के युद्ध का इतिहास सामने आता है। चीन ने धोका देकर भारत के साथ लड़ाई थोपी थी। तब भारत को आजाद हुए 17 वर्ष ही हुए थे। देश किसी भी तरह से सैनिकों को अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित नही कर पाया था।
दूसरी ओर तब हिंदी चीनी भाई-भाई के मीठे नारों से तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को विश्वास में लिए हुए था। लेकिन चीन की नीयत साफ नहीं थी, वह भारत की सीमा पर नजर गढ़ाये तो था ही, साथ ही भारत की भूमि को हड़पने की कोशिश कर रहा था। आज भी चीन की नजर अरुणाचल को लेने की है। बार-बार उसे अपना हिस्सा मानता है।
1962 के युद्ध में सेना अस्त्रों के अभाव में थी, इस वजह से चीन भारत की सीमाओं के अंदर तक घुसकर भारत की भूमि हथियाने में कामयाब रहा। इस घटना से सबक भारत ने सीखा । और फिर जितने भी बाद के युद्व भारत ने लड़े, सब में सेना ने अपने रण कौशल का परिचय दिया। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्व और 1971 का पाकिस्तान के साथ युद्ध में एक ऐतिहासिक जीत दिलवाई थी। पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लदेश को अलग कर दिया था।
इसी तरह कारगिल युद्व में भी पाकिस्तान को जर्बदस्त शिकस्त दी। और हाल के 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के द्वारा पाकिस्तान को युद्ध विराम के लिए मजबूर कर दिया। यदि भविष्य में कोई युद्ध पाकिस्तान के साथ भारत लड़ेगा, तो उस युद्ध में आधुनिक सशस्त्र, जिनका जिक्र रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं कि 79 हजार करोड़ रुपये के हथियारों से सुसज्जित सैनिक लड़ाई करने के लिए तैयार रहेंगे। साथ ही नौ सेना और वायु सेना के लिए भी रक्षा सौदे की मंजूरी दी गई।







