india pakistan water dispute: पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंक को समर्थन देने वाले पाकिस्तान पर भारत लगातार रणनीतिक दबाव बढ़ा रहा है। सैन्य कार्रवाई के बाद अब भारत ने जल कूटनीति के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के दूसरे चरण को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले को सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत का सबसे बड़ा जल-रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।
पर्यावरण समिति से मिली मंजूरी
पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने अपनी 45वीं बैठक में 260 मेगावाट क्षमता वाली दुलहस्ती चरण-दो परियोजना को स्वीकृति प्रदान की। लगभग 3,200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ तकनीक पर आधारित होगी, जिससे बिना बड़े बांध के बिजली उत्पादन किया जाएगा।
india pakistan water dispute: सिंधु जल संधि निलंबन का असर
समिति ने स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि 23 अप्रैल 2025 से सिंधु जल संधि प्रभावी रूप से निलंबित है। इससे पहले चिनाब बेसिन से जुड़ी सभी परियोजनाएं संधि की शर्तों के तहत सीमित थीं, लेकिन अब भारत को सिंधु घाटी में जल संसाधनों के उपयोग की खुली छूट मिल गई है।
पाकिस्तान की बढ़ती चिंता
संधि के दौरान पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर प्रमुख अधिकार प्राप्त थे, जबकि भारत रावी, ब्यास और सतलुज तक सीमित था। अब हालात बदल चुके हैं। दुलहस्ती परियोजना की मंजूरी के बाद पाकिस्तान की जल सुरक्षा को लेकर बेचैनी और तेज हो गई है, जिसे वहां के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बयानों से साफ देखा जा सकता है।
india pakistan water dispute: सिंधु घाटी में तेज़ हुई परियोजनाएं
दुलहस्ती के अलावा भारत सावलकोट, रातले, बरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीर्थई (फेज-1 और 2) जैसी कई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ा रहा है। इन परियोजनाओं से न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि जम्मू-कश्मीर के विकास को भी नई गति मिलेगी।
क्या है दुलहस्ती परियोजना?
दुलहस्ती चरण-दो, वर्ष 2007 से संचालित 390 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-एक परियोजना का विस्तार है, जिसे एनएचपीसी ने सफलतापूर्वक संचालित किया है। नए चरण के जुड़ने से क्षेत्र में बिजली उत्पादन क्षमता और रणनीतिक मजबूती दोनों में इजाफा होगा।
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