India-US trade deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतरिम ढांचे को लेकर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते से डेयरी सेक्टर को पूरी तरह बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र में अमेरिका को किसी भी प्रकार की छूट या शर्तों के साथ अनुमति नहीं दी गई है।
कई कृषि उत्पादों पर कोई राहत नहीं
वाणिज्य भवन में पत्रकारों से बातचीत में गोयल ने बताया कि मांस, मुर्गी पालन, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा, हरी मटर, मूंग, चना, तिलहन, पशु आहार उत्पाद, तंबाकू और कई फलों जैसे केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी व खट्टे फलों पर भी कोई रियायत नहीं दी गई है। सरकार ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में घरेलू किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है।
India-US trade deal: सेब और कपास पर क्या बदलेगा
सेब और कपास के आयात को लेकर मंत्री ने कहा कि भारत में इनकी खपत उत्पादन से अधिक है, इसलिए पहले से ही इनका आयात होता रहा है। वर्तमान में सेब का बेस प्राइस 50 रुपये है, जिस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगता है। नए समझौते में सेब का बेस प्राइस 80 रुपये और टैरिफ 25 प्रतिशत होगा, जिससे आयातित सेब की कीमत 100 रुपये तक पहुंचेगी। साथ ही आयात पर कोटा भी तय किया गया है, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान नहीं होगा।
किसानों के हित सर्वोपरि
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कपास के मामले में भी स्थिति समान है और इससे किसानों को किसी प्रकार की हानि नहीं होगी। सरकार लगातार किसानों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है।
India-US trade deal: जीरो ड्यूटी पर बढ़ेगा निर्यात
पीयूष गोयल ने बताया कि इस व्यापार समझौते के तहत मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, काजू सहित कई कृषि उत्पादों का अमेरिका को जीरो ड्यूटी पर निर्यात किया जाएगा। इसके अलावा रत्न एवं आभूषण, फार्मा उत्पाद और स्मार्टफोन के निर्यात पर भी शून्य शुल्क लागू होगा।
500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
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