Indian Air Force MRTT: भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार बड़े फैसले ले रहा है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने भारतीय वायु सेना के लिए छह मल्टीरोल टैंकर ट्रांसपोर्ट (MRTT) विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 1.1 अरब डॉलर यानी लगभग 9,978 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
हवा में ही मिलेगा ईंधन, मिशन होंगे और लंबे
इन टैंकर विमानों के आने से राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे लड़ाकू विमान बिना जमीन पर उतरे हवा में ही ईंधन भर सकेंगे। इससे लंबी दूरी के अभियानों में लड़ाकू विमानों की निर्भरता बेस पर कम होगी और मिशन की अवधि व प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाएगी।
Indian Air Force MRTT: पुराने Il-78 विमानों की होगी जगह
फिलहाल वायु सेना के पास रूसी मूल के Il-78 टैंकर विमान हैं, जो 20 साल से ज्यादा समय से सेवा में हैं और अब अपनी ऑपरेशनल क्षमता खो रहे हैं। मेंटेनेंस लागत बढ़ने और तकनीकी सीमाओं के कारण इन्हें बदलना जरूरी हो गया था। MRTT को इसी जरूरत का समाधान माना जा रहा है।
HAL-IAI साझेदारी से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
यह कार्यक्रम इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के नेतृत्व में होगा, जिसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की अहम भूमिका रहेगी। HAL भारत में ही इन विमानों के रखरखाव और ओवरहॉल की सुविधा विकसित करेगा, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बल मिलेगा।
चीन-पाक को रणनीतिक संदेश
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि MRTT विमानों की तैनाती से हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी। चीन की बढ़ती हवाई ताकत और पाकिस्तान के साथ संभावित तनावों के बीच यह फैसला भारत की वायु प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती देगा। छह MRTT विमानों की यह डील भारतीय वायु सेना के लिए सिर्फ तकनीकी अपग्रेड नहीं, बल्कि भविष्य की युद्ध तैयारियों की नींव है, जो भारत को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में अग्रणी बनाएगी।







