Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पेयजल में सीवेज मिल जाने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। गंदे पानी से गंभीर बीमारियां फैलने के बाद अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। सरकारी रिपोर्ट में भले ही मौतों का आंकड़ा 4 बताया गया हो, लेकिन जमीन पर सच्चाई कहीं ज्यादा खौफनाक है। मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तय कर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस त्रासदी का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से डिटेल रिपोर्ट तलब की है और दो हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है।सरकार के बयान और हकीकत में भारी अंतर ने सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकार कम मौतें होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित परिवार अपनी पीड़ा बता रहे हैं। पांच महीने के मासूम से लेकर बुजुर्ग तक इस जहरीले पानी का शिकार बने हैं।
Indore News: कैसे बना पानी ‘जहर’?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ड्रेनेज के गंदे पानी के पेयजल लाइन में मिल जाने से हालात गंभीर हुए। टॉयलेट का कचरा, बाथरूम का गंदा पानी, बर्तन धोने का साबुन, केमिकल, डिटर्जेंट… सब ड्रेनेज में जाकर मिला और फिर यही मिश्रण पेयजल में पहुंच गया। ऐसी स्थिति में Shigella, Salmonella, E.coli और हैजा जैसे घातक बैक्टीरिया फैलते हैं, जो इंसानी जान तक ले लेते हैं।
Indore News: राजनीति भी गरमाई
मामले पर सियासत तेज हो चुकी है। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के भीतर भी असहजता बढ़ती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे सरकार के लिए ‘कठिन परीक्षा की घड़ी’ बताया, तो राहुल गांधी ने इसे जीवन के अधिकार की हत्या करार देते हुए सरकार, प्रशासन और जवाबदेह नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।
कौन है जिम्मेदार?
पेयजल जैसी मूल सुविधा में ऐसी लापरवाही ने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पाइपलाइन लीक, निगरानी में चूक, जिम्मेदारों का सुस्त रवैया—इन सबकी कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।
अब सबकी नजरें हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों, NHRC की रिपोर्ट और सरकार के कदमों पर हैं। जनता का सिर्फ एक सवाल है आखिर उनकी जिंदगी से हुआ ये खिलवाड़ किसकी जिम्मेदारी है और कब तक?
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