Iran crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच देश के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की कमी को लेकर अफवाहें फैल रही हैं। इन खबरों के चलते पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें और लोगों में घबराहट देखने को मिली। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी तरह की कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और रिफाइनरी) सुजाता शर्मा के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल पर्याप्त ईंधन स्टॉक मौजूद है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हों, लेकिन भारत ने पहले से तैयारी कर रखी है। देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आएगी। इतना ही नहीं, घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 40% तक बढ़ोतरी भी हुई है।
कमर्शियल गैस सप्लाई पर सरकार का बड़ा फैसला
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% एलपीजी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते करता है, जो इस समय संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। ऐसे में सरकार ने रणनीति बदलते हुए पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी। शुरुआत में कमर्शियल गैस सप्लाई को सीमित किया गया था, लेकिन अब इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर करीब 70% तक कर दिया गया है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि ढाबों, होटल-रेस्तरां और औद्योगिक कैंटीनों को किसी तरह की दिक्कत न हो।
Iran crisis: प्रवासी मजदूरों और उद्योगों को राहत
सरकार ने इस दौरान प्रवासी मजदूरों और छोटे कामगारों का भी खास ध्यान रखा है। मंत्रालय के अनुसार, करीब 30,000 छोटे (5 किलो वाले) गैस सिलेंडर बांटे गए हैं। वहीं स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और केमिकल जैसे अहम उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर गैस सप्लाई दी जा रही है, ताकि उत्पादन पर असर न पड़े।
पड़ोसी देशों से बेहतर स्थिति में भारत
Iran crisis: सरकार का कहना है कि जहां कई पड़ोसी देशों में ईंधन की भारी किल्लत और कीमतों में तेजी देखी जा रही है, वहीं भारत में स्थिति नियंत्रण में है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों को भी स्थिर रखा गया है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। कुल मिलाकर, सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने की बजाय भरोसा बनाए रखना चाहिए।
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