Iran crisis: मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायब मोतलघ ने कहा है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है। उन्होंने इसे भारत और ईरान की पुरानी दोस्ती का उदाहरण बताया।
भारत-ईरान दोस्ती पर जोर
मोतलघ ने कहा कि ईरान हमेशा से भारत का भरोसेमंद साझेदार रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में गैस की कमी की खबरों ने तेहरान को चिंतित किया, जिसके बाद यह सुनिश्चित किया गया कि भारतीय जहाज बिना किसी खतरे के अपनी मंजिल तक पहुंच सकें। उनके मुताबिक, हालात बेहद संवेदनशील हैं और छोटी सी चूक भी बड़ा संकट पैदा कर सकती है, लेकिन इसके बावजूद ईरान ने सुरक्षित मार्ग देने की जिम्मेदारी निभाई।
Iran crisis: भारत पहुंच रहे एलपीजी टैंकर
इसी कड़ी में इस हफ्ते भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ गुजरात के वाडिनार पोर्ट पहुंचा, जबकि इससे पहले ‘शिवालिक’ मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच चुका है। दोनों जहाज होर्मुज स्ट्रेट से होकर आए, जहां इन दिनों ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच तनाव के चलते समुद्री रास्ते जोखिम भरे बने हुए हैं।
इजरायल पर हमले का आरोप
मोतलघ ने आरोप लगाया कि इज़रायल ने ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाकर संघर्ष की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाब दिया।
Iran crisis: “हमने कभी पहले हमला नहीं किया”
ईरानी दूत ने कहा कि उनका देश हमेशा शांति का समर्थक रहा है और उसने कभी पहले हमला नहीं किया। उनके अनुसार, ईरान ने सिर्फ जवाबी कार्रवाई की और अपने ठिकानों व सहयोगियों की रक्षा की।
‘व्यवस्था चलाती है देश, व्यक्ति नहीं’
उन्होंने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत को बड़ी क्षति बताया, लेकिन कहा कि इससे देश की व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान में शासन किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि मजबूत व्यवस्था पर आधारित है, इसलिए नेतृत्व में बदलाव के बावजूद देश सुचारु रूप से काम करता रहता है।
अमेरिका पर भी साधा निशाना
Iran crisis: मोतलघ ने अमेरिका पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह दुनिया के सामने अपनी सेना को अजेय दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन वास्तविकता अलग है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने हाल के संघर्ष में कई दुश्मन जहाजों को नुकसान पहुंचाया और आधुनिक तकनीक के दम पर जवाब दिया।
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