Iran crisis: इजरायल-ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पाकिस्तानी जहाज को कराची जाने की अनुमति नहीं दी और उसे वापस लौटा दिया।
होर्मुज से गुजरने नहीं दिया जहाज
ईरान के अधिकारियों ने साफ किया कि कराची जा रहे कंटेनर जहाज को जरूरी मंजूरी नहीं मिली थी, इसलिए उसे जलडमरूमध्य पार करने से रोक दिया गया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र में युद्ध के कारण तेल और गैस की आवाजाही पहले से ही प्रभावित है।
Iran crisis: IRGC ने बताया नियमों का उल्लंघन
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि जहाज ने तय कानूनी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया था। IRGC नेवी के मुताबिक, होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी समुद्री प्राधिकरण के साथ समन्वय करना अनिवार्य है, वरना उसे रोका जा सकता है।
Iran crisis: ट्रांजिट फीस को लेकर भी सख्ती
ईरान ने हाल ही में कुछ जहाजों पर भारी ट्रांजिट फीस लगानी शुरू की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जहाजों से लगभग 20 लाख डॉलर तक वसूले जा रहे हैं। ईरान का कहना है कि युद्ध के हालात में यह कदम उसकी रणनीति का हिस्सा है।
पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों पर असर
यह घटना ऐसे वक्त हुई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। इससे पाकिस्तान की डिप्लोमैटिक पहल को बड़ा झटका माना जा रहा है।
Iran crisis: ट्रंप के समर्थन के बाद भी नहीं बदला रुख
खास बात यह है कि इस घटना से कुछ समय पहले ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहबाज शरीफ की उस पोस्ट को शेयर किया था, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पेशकश की थी। इसके बावजूद ईरान ने सख्त रुख अपनाया।
ईरान का साफ संदेश
Iran crisis: ईरान के राष्ट्रपति ने भी हाल ही में कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन जो देश उसकी संप्रभुता को चुनौती देते हैं, उनके लिए सख्ती बरती जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम को ईरान की क्षेत्रीय ताकत और रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
ये भी पढ़ें: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत







