Iran crisis: हिंद महासागर में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में ईरान का युद्धपोत IRIS DENA डूबने के बाद अब एक और ईरानी युद्धपोत इस इलाके में फंसा हुआ है। इस पोत ने श्रीलंका से उसके जलीय क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति और आपात सहायता मांगी है। श्रीलंका सरकार ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कदमों पर विचार किया जा रहा है।
टारपीडो हमले में डूबा ईरानी युद्धपोत
बुधवार को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने टारपीडो हमला कर ईरान के युद्धपोत IRIS DENA को निशाना बनाया था। इस हमले के बाद पोत डूब गया। हमले के बाद श्रीलंका की नौसेना ने राहत और बचाव अभियान चलाकर कई नाविकों को बचाया, जबकि बड़ी संख्या में नौसैनिकों की मौत भी हुई।
Iran crisis: 80 से ज्यादा नाविकों के शव बरामद
श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिणी तट के पास हुए इस हादसे के बाद डूबे युद्धपोत से करीब 80 से अधिक ईरानी नाविकों के शव बरामद किए गए हैं। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए गॉल के करापिटिया अस्पताल भेजा गया है, जबकि हमले में घायल हुए कई नाविकों का इलाज भी वहीं चल रहा है।
Iran crisis: श्रीलंका कर रहा स्थिति की समीक्षा
सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने संसद में कहा कि श्रीलंका को दूसरे ईरानी युद्धपोत के बारे में जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि यह पोत श्रीलंका के विस्तारित आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी देश के जलक्षेत्र में प्रवेश नहीं किया है। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि जहाज पर मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएं।
अभ्यास के बाद लौट रहा था बेड़ा
Iran crisis: सूत्रों के अनुसार, जिस ईरानी नौसैनिक बेड़े पर हमला हुआ वह भारत के विशाखापत्तनम से एक सैन्य अभ्यास पूरा करने के बाद अपने देश लौट रहा था। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया था।
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