Iran crisis: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने ही कुछ वरिष्ठ सहयोगियों की निजी चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया। व्हाइट हाउस के दो वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासन से जुड़े एक रिपब्लिकन नेता के मुताबिक, ट्रंप को पहले ही आगाह किया गया था कि यह तनाव काबू से बाहर भी जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हमले का रास्ता चुना। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले यह फैसला राजनीतिक रूप से भी जोखिम भरा माना जा रहा है। अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर पड़ सकता है।
छवि सुधारने की रणनीति?
वॉशिंगटन में इस सैन्य कार्रवाई के बाद साफ तौर पर राजनीतिक बंटवारा नजर आ रहा है। डेमोक्रेट्स खुलकर विरोध में हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद उभर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, हमले से पहले ट्रंप बार-बार यह जानना चाहते थे कि क्या इस कदम से घरेलू स्तर पर उनकी “मजबूत नेता” वाली छवि को फायदा होगा। कुछ सलाहकारों ने साफ कहा था कि खुफिया जानकारी ऐसी कोई गारंटी नहीं देती कि हालात नियंत्रण में रहेंगे। इसके बावजूद ट्रंप ने उन सलाहकारों की राय को तरजीह दी जो मानते थे कि निर्णायक सैन्य कार्रवाई से उनका नेतृत्व मजबूत दिखेगा, भले ही दीर्घकालिक खतरे क्यों न हों। व्हाइट हाउस के अंदर यह चिंता भी जताई गई है कि अगर युद्ध लंबा चला, अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई, जवाबी हमले तेज हुए या पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं तो इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Iran crisis: सर्वे में झटका
हालिया Reuters / Ipsos सर्वे के आंकड़े ट्रंप के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। सिर्फ 27% अमेरिकी नागरिक ही ईरान पर हमले का समर्थन कर रहे हैं। करीब 56% लोगों का मानना है कि ट्रंप सैन्य बल के इस्तेमाल को लेकर जरूरत से ज्यादा उतावले हैं। 87% डेमोक्रेट्स इस नीति के खिलाफ हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 23% रिपब्लिकन समर्थक भी इस कदम से सहमत नहीं हैं। सर्वे उस वक्त किया गया था जब तक ईरान में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबर सार्वजनिक नहीं हुई थी। यानी शुरुआती आंकड़े ही सरकार के लिए मुश्किल संकेत दे रहे थे।
चुनावी गणित पर असर?
Iran crisis: अगर हालात और बिगड़ते हैं तो यह मुद्दा मध्यावधि चुनाव में बड़ा फैक्टर बन सकता है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस पर पकड़ बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल ट्रंप का दांव यह है कि मजबूत कार्रवाई उन्हें निर्णायक नेता के तौर पर पेश करेगी। लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो यह फैसला राजनीतिक तौर पर भारी भी पड़ सकता है।
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