Iran US Tension: ईरान इस समय देश के कई हिस्सों में फैली हिंसा के कारण गंभीर संकट से गुजर रहा है। इसी बीच ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अबुकर दाहिर उस्मान को एक पत्र लिखकर अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अमेरिका पर आरोप, संयुक्त राष्ट्र को पत्र
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका हिंसा को भड़का रहा है और देश के खिलाफ बल प्रयोग की धमकी दे रहा है। इसी को लेकर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद से मांग की है कि अमेरिका के इस रवैये की निंदा की जाए। ईरान ने अपने पत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति के एक सोशल मीडिया पोस्ट का भी हवाला दिया है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा था,“ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखें। अपनी संस्थाओं पर कब्जा करें। मदद आ रही है।”

Iran US Tension: ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि यह फैसला ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रही हिंसा के कारण लिया गया है। उन्होंने कहा,“जब तक प्रदर्शनकारियों की बेमतलब हत्याएं बंद नहीं होतीं, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं।”
25% टैरिफ की धमकी के बाद फैसला
यह घोषणा ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापारिक लेन-देन पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप ने जिन्हें उन्होंने “ईरानी देशभक्त” कहा, उनसे विरोध जारी रखने और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के सबूत जुटाने की अपील की। उन्होंने कहा, “सभी ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखें। अगर संभव हो तो अपनी संस्थाओं पर कब्जा करें और हत्यारों व दुर्व्यवहार करने वालों के नाम सुरक्षित रखें।”

मौतों पर ट्रंप की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान में हुई मौतों के आंकड़े अलग-अलग बताए जा रहे हैं, लेकिन जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा,“मैं पांच अलग-अलग आंकड़े सुन रहा हूं। एक मौत भी बहुत ज्यादा है।” उन्होंने हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को चेतावनी दी कि इसके गंभीर परिणाम होंगे। इससे पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोमवार को कहा था कि ईरान से निपटने के लिए अमेरिका की प्राथमिकता अब भी कूटनीति ही है, हालांकि ट्रंप प्रशासन जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्पों से भी पीछे नहीं हटेगा।
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